Mohit Jain
Basant Panchmi 2026: बसंत पंचमी का पावन पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान, बुद्धि, कला, संगीत और वाणी की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन और विद्या के प्राकट्य का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधिवत पूजा करने से स्मरण शक्ति, वाणी की मधुरता, अध्ययन में एकाग्रता और रचनात्मक क्षमता का विकास होता है। विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक और कलाकारों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है।
Basant Panchmi 2026: पंचमी तिथि और पर्व का समय
इस वर्ष पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 02:28 बजे से प्रारंभ होकर 24 जनवरी 2026 को रात 01:46 बजे तक रहेगी। इसी अवधि में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व शीत ऋतु के अंत और बसंत ऋतु के स्वागत का संकेत देता है। खेतों में सरसों की पीली फसल, प्रकृति में नई ऊर्जा और जीवन में सकारात्मकता का संचार इस पर्व से जुड़ा माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की आराधना से विद्या, बुद्धि, विवेक और रचनात्मकता में वृद्धि होती है। इसी कारण स्कूलों, कॉलेजों, संगीत संस्थानों और घरों में विशेष पूजा की जाती है।
मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, सरस्वती पूजा का सर्वोत्तम समय प्रातः काल माना गया है।
शुभ पूजा मुहूर्त:
सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
इस अवधि में पूजा, लेखन, अध्ययन, संगीत अभ्यास और नए कार्यों की शुरुआत करना विशेष फलदायी माना गया है।
Basant Panchmi 2026: मां सरस्वती की पूजा विधि

बसंत पंचमी के दिन पूजा विधि को सरल और शुद्ध रखा जाता है।
स्नान और शुद्धता:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थान को स्वच्छ एवं पवित्र करें।
पीले वस्त्र धारण करें:
पीला रंग बसंत ऋतु, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
मूर्ति या चित्र स्थापना:
घर के पूजा स्थान पर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
दीप प्रज्वलन:
घी का दीपक और अगरबत्ती जलाकर पूजा का आरंभ करें।
फूल और प्रसाद अर्पण:
पीले फूल, अक्षत, रोली, हल्दी और मीठा प्रसाद जैसे केसर भात या बूंदी के लड्डू अर्पित करें।
पुस्तक और वाद्य यंत्र:
पुस्तकें, कॉपियां, कलम और संगीत के वाद्य यंत्र मां सरस्वती के पास रखें और विद्या की प्रार्थना करें।
देवी सरस्वती का मंत्र
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है-
“या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
मान्यता है कि इस मंत्र का 108 बार जाप करने से स्मरण शक्ति तेज होती है, वाणी में मधुरता आती है और अध्ययन में सफलता मिलती है।
बसंत पंचमी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था।
कथा के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना तो कर दी, लेकिन संसार में गहरी नीरवता थी। जीवों में संवाद नहीं था, चारों ओर उदासी और शांति व्याप्त थी। यह देखकर ब्रह्मा जी को लगा कि सृष्टि में कोई कमी रह गई है।
तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ। उस प्रकाश से एक देवी प्रकट हुईं, जिनके हाथों में वीणा थी और मुख पर अलौकिक तेज था। वही देवी मां सरस्वती थीं।
ब्रह्मा जी के आदेश पर मां सरस्वती ने अपनी वीणा के मधुर स्वर से संसार को वाणी और ध्वनि प्रदान की। इसके बाद ही जीवों में संवाद, ज्ञान और अभिव्यक्ति का आरंभ हुआ। इसी कारण मां सरस्वती को वाणी, विद्या और बुद्धि की देवी कहा जाता है।
बसंत पंचमी पर व्रत और परंपराएं
कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं। बच्चों की शिक्षा की शुरुआत, लेखन कार्य, संगीत साधना और नए कार्यों की शुरुआत बसंत पंचमी को अत्यंत शुभ मानी जाती है।
बसंत पंचमी 2026 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और रचनात्मकता का उत्सव है। मां सरस्वती की कृपा से जीवन में विद्या, विवेक और सकारात्मकता का संचार होता है। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन को नई दिशा प्रदान करती है।
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( Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. स्वदेश न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है। )





