Isa Ahmad
REPORT- FARHAN KHAN
एचआईवी के खिलाफ दिया सशक्त संदेश
विश्व एड्स दिवस के अवसर पर आगरा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से भव्य जागरूकता परेड का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम से शहरवासियों को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक रहने और इसके संक्रमण से बचाव का संदेश दिया गया। परेड को जिला क्षय रोग एवं एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
परेड में एएनएम प्रशिक्षु छात्राएं, एनसीसी-एनएसएस स्वयंसेवक, आईसीटीसी/पीपीसीटीसी काउंसलर, एएसके-एसटीआई यूनिट, जन चेतना सेवा समिति, पंचशील वेलफेयर सोसाइटी, आगरा पॉजिटिव वेलफेयर सोसाइटी, चेतना सोसाइटी सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस दौरान लोगों को एचआईवी की रोकथाम, सुरक्षित व्यवहार और संक्रमित व्यक्तियों के सम्मान के संदेश दिए गए।
सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस वर्ष विश्व एड्स दिवस की थीम “बाधाएँ दरकिनार, एचआईवी पर सशक्त प्रहार” है। इसका उद्देश्य एचआईवी/एड्स से जुड़े भ्रम और सामाजिक बाधाओं को समाप्त करना, साथ ही संक्रमित लोगों के स्वास्थ्य अधिकारों को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि एचआईवी से पीड़ित मरीजों को छह माह तक टीबी से बचाव की दवा लेना अनिवार्य है, क्योंकि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण उनमें टीबी का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
डॉ. सुखेश गुप्ता ने एड्स फैलने के चार प्रमुख कारण बताए-
असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई का उपयोग, संक्रमित रक्त चढ़ाना और एचआईवी संक्रमित गर्भवती मां से बच्चे में संक्रमण।
उन्होंने जानकारी दी कि जिले में वर्तमान में 5397 सक्रिय एचआईवी मरीज हैं और इस वर्ष 587 नए मरीज पंजीकृत हुए हैं। वर्ष 2025 में खोजे गए 28002 टीबी मरीजों में से 129 मरीज ऐसे मिले, जिनमें टीबी के साथ एचआईवी संक्रमण भी पाया गया। इन सभी का दोहरी दवा पद्धति से उपचार जारी है। उन्होंने चेताया कि लंबे समय तक बिना उपचार एचआईवी रहने पर व्यक्ति एड्स की अवस्था में पहुंच जाता है, जहाँ शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता अत्यंत कमजोर हो जाती है।
कार्यक्रम में उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एस.के. राहुल, जिला क्षय रोग केंद्र का स्टाफ, दिशा क्लस्टर टीम, एएनएमटीसी प्रभारी डॉ. सलोनी सहित स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
यह कार्यक्रम शहर में एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।





