Report by: Raja, Edit by: Priyanshi Soni
Ajaygarh Fort Contaminated Water: इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई गंभीर घटना के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशभर में पेयजल की शुद्धता को लेकर प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा है। सागर संभाग आयुक्त ने सभी जिलों के कलेक्टरों और नगर निकाय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जलाशयों, पाइपलाइनों और पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी या संक्रमण से लोगों को बचाया जा सके।
लेकिन इन आदेशों के बावजूद पन्ना जिले के अजयगढ़ में प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है।
Ajaygarh Fort Contaminated Water: मकर संक्रांति मेले से पहले बिगड़े हालात
अजयगढ़ का ऐतिहासिक अजयपाल किला, जहां हर वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर विशाल मेला लगता है, कुछ ही दिनों में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने वाला है। श्रद्धालु यहां भगवान अजयपाल के दर्शन करने आते हैं और शुद्ध घी से बने पकवानों का भोग लगाकर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करते हैं।
लेकिन किले की ऊँची पहाड़ी पर स्थित जिस तालाब के पानी का उपयोग स्नान, भोजन और प्रसाद निर्माण में किया जाता है, उसकी हालत बेहद चिंताजनक है।
Ajaygarh Fort Contaminated Water: हरा पड़ा तालाब, चारों ओर गंदगी
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि तालाब में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। पूरा पानी हरे रंग में तब्दील हो चुका है, जिससे इसके पूरी तरह दूषित होने के संकेत मिल रहे हैं। इसके बावजूद श्रद्धालु मजबूरी में इसी पानी का इस्तेमाल नहाने, खाने-पीने और प्रसाद बनाने में कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आस्था उनके लिए ज़रूरी है, लेकिन साफ पानी न मिलने के कारण गंदा पानी पीना मजबूरी बन गया है।

Ajaygarh Fort Contaminated Water: अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों ने तालाब के दूषित पानी को लेकर संबंधित अधिकारियों के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई है। यहां तक कि गंदे पानी के सैंपल भी अधिकारियों को दिखाए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई। वहीं अजयगढ़ एसडीएम इस मामले को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं और पत्राचार की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं।
Ajaygarh Fort Contaminated Water: पुरातत्व विभाग ने माना- पानी पीने योग्य नहीं
दूसरी ओर पुरातत्व विभाग के अधिकारी ने साफ शब्दों में स्वीकार किया है कि किले में स्थित तालाब का पानी पीने योग्य नहीं है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से वैकल्पिक स्वच्छ जल व्यवस्था या तालाब की सफाई को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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