रिपोर्ट- विशाल कुमरावत, बड़वाह, एडिट- विजय नंदन
बड़वाह: सर्वपितृ अमावस्या और श्राद्धपक्ष के समापन पर शुक्रवार को नावघाटखेड़ी के नर्मदा तट पर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण, पूजन और स्नान करने पहुंचे।
इस दौरान घाट पर एक अनोखा और रोमांचक दृश्य भी देखने को मिला। एक श्रद्धालु अपने अनुयायियों के साथ नंगी तलवार पर चलते हुए नर्मदा तक पहुंचा। अनुयायियों ने तलवार को दोनों ओर हाथों में पकड़ रखा था और वह व्यक्ति हवा में तलवार पर पैर रखते हुए लगभग 300 फीट तक चला। नर्मदा तट तक पहुंचने के बाद उसने स्नान कर अपने शस्त्र और निशान का पूजन किया।
इसी तरह एक अन्य श्रद्धालु ने हाथ में धारदार शस्त्र लेकर ढोल की थाप पर नृत्य करते हुए स्वयं की जीभ काट ली। यह दृश्य देखकर आसपास मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।

पंडित गिरिजाशंकर अत्रे ने बताया कि “यह साधना और तपस्या विशेष सिद्धि के लिए की जाती है, जिसे श्रद्धालु वर्षों की साधना के बाद करते हैं। नर्मदा स्नान और तर्पण से पितरों की शांति और पुण्य लाभ प्राप्त होता है।”
सुबह 7:30 बजे से ही घाट ढोल-ढमाकों की आवाज से गूंज रहा था। आस्था और श्रद्धा के बीच महिला-पुरुषों ने दीनहीनों को अन्न, वस्त्र, फल व भोजन दान कर पुण्य अर्जित किया।
घटना के दौरान SDOP अर्चना रावत, टीआई बलराम राठौर और पुलिसकर्मी ट्रैफिक व भीड़ प्रबंधन में मुस्तैद रहे।
डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा किए गए पारंपरिक एवं धार्मिक आयोजनों के वर्णन पर आधारित है। इसमें बताई गई क्रियाएं आस्था और व्यक्तिगत विश्वास से जुड़ी हैं। ऐसे किसी भी कार्य या अनुष्ठान को अपनाने से पहले सुरक्षा, स्वास्थ्य और कानूनी पहलुओं पर अवश्य विचार करें। समाचार पोर्टल इस तरह की गतिविधियों का समर्थन या प्रोत्साहन नहीं करता।





