मध्यप्रदेश में सड़क हादसों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। साल 2025 के पहले छह महीनों (जनवरी-जून) में प्रदेश में 69,951 सड़क हादसे दर्ज हुए। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 61% यानी 40,441 पीड़ित 30 साल से कम उम्र के थे।
108 एम्बुलेंस की रिपोर्ट बताती है कि करीब 35-40% हादसे तेज रफ्तार (ओवर स्पीडिंग) की वजह से हुए।
क्यों सबसे ज्यादा खतरे में हैं युवा?
- सड़क हादसों में मरने या गंभीर रूप से घायल होने वालों की उम्र अधिकतर 16 से 30 वर्ष के बीच है।
- यही वह समय होता है जब युवा पढ़ाई, करियर और नौकरी की शुरुआत कर रहे होते हैं।
- लेकिन रफ्तार का जुनून और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी उनकी जिंदगी को अधूरा कर रही है।
हादसों की असली वजह: रफ्तार और लापरवाही
ओवर स्पीडिंग सिर्फ एक नियम तोड़ना नहीं, बल्कि जिंदगी को खतरे में डालना है।
- ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी
- गलत दिशा में वाहन चलाना
- हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना
ये सभी कारण सड़क हादसों को और भी खतरनाक बना रहे हैं।
केस-1: 3 दोस्तों की जान, एक जिंदगी अधूरी
4 जनवरी, भोपाल – धुंध भरी रात, गांधी नगर से हमीदिया अस्पताल की सड़क पर खड़ा एक खराब ट्रक और तेज रफ्तार से आ रही कार।
- टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का बोनट चकनाचूर हो गया।
- कार चला रहे शैलेष गुप्ता के तीन दोस्तों की मौके पर मौत हो गई।
- शैलेष 15 दिन तक बेहोश रहे, 7 जगह हड्डियां टूटीं और जबड़े की हड्डी भी चकनाचूर हो गई।
- उनकी जिंदगी बची सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने सीट बेल्ट पहनी थी।
आज हादसे के 8 महीने बाद शैलेष कहते हैं –
“मेरा आत्मविश्वास टूट गया है। पहले मैं सबसे खुलकर बात करता था, अब नजर मिलाने में भी डरता हूं। रफ्तार ने मेरी सबसे कीमती चीजें मुझसे छीन लीं।”
केस-2: SUV की टक्कर से जिंदगी थमी
मई 2025, भोपाल – एक निजी अस्पताल के मैनेजर रत्नाकर ड्यूटी के लिए बाइक से जा रहे थे।
- ग्रीन सिग्नल पर आगे बढ़ते ही गलत दिशा से आई तेज रफ्तार SUV ने उन्हें पीछे से टक्कर मारी।
- दोनों पैर और पंजे टूट गए, रीढ़ की हड्डी समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।
- तीन महीने बाद भी वह बेड रेस्ट पर हैं और जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
गांधी मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. कुलदीप गुप्ता के अनुसार –
- सड़क हादसों के बाद ट्रॉमा में आने वाले 10 गंभीर मरीजों में से 3 की मौत हो जाती है।
- सबसे ज्यादा मौतें हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनने की वजह से होती हैं।
- हेलमेट मस्तिष्क को बचाता है, जबकि सीट बेल्ट कई बार जीवनरक्षक साबित होती है।
समाधान क्या है?
- ओवर स्पीडिंग से बचें – कुछ मिनट की जल्दी जिंदगी छीन सकती है।
- हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें – ये छोटे कदम बड़े हादसे से बचा सकते हैं।
- ट्रैफिक नियमों का पालन करें – लाल बत्ती पर रुकना और सही दिशा में चलना आपकी और दूसरों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
- युवाओं में जागरूकता – स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थलों पर सड़क सुरक्षा को लेकर अभियान चलाने की जरूरत है।
मध्यप्रदेश में सड़क हादसों का बढ़ता ग्राफ केवल आंकड़े नहीं, बल्कि अधूरी रह गई कहानियां हैं। खासकर युवाओं की जानें सबसे ज्यादा खतरे में हैं। समय आ गया है कि हम रफ्तार की बजाय जिम्मेदारी को महत्व दें। क्योंकि घर देर से पहुंचना बेहतर है, बनिस्बत कभी घर न पहुंचने के।





