BY: Yoganand Shrivastva
पटना: बिहार के पूर्व आरजेडी विधायक राजबल्लभ यादव को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सुनाए गए आजीवन कारावास की सजा को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। इससे पहले निचली अदालत ने 2016 की इस घटना में उन्हें दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण 6 फरवरी 2016 का है, जब नवादा जिले में राजबल्लभ यादव पर अपने आवास पर एक नाबालिग लड़की से बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के अनुसार, एक महिला ने जन्मदिन पार्टी का बहाना बनाकर लड़की को बोलेरो वाहन से गिरियक स्थित एक घर में पहुंचाया, जहां कथित तौर पर यह वारदात हुई।
आरजेडी ने किया था निलंबित
आरोप लगने के बाद राजद ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। हालांकि, उनके परिवार की राजनीतिक सक्रियता जारी रही। वर्ष 2020 में उनकी पत्नी विभा देवी ने राजद के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता।
परिवार और पार्टी के रिश्तों में दरार
हाल के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने उनके परिवार से दूरी बना ली। राजबल्लभ के भाई विनोद यादव को टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और राजद प्रत्याशी की हार का कारण बने। इस राजनीतिक खींचतान के बीच, राजद नेता तेजस्वी यादव ने नवादा के जेडीयू के पूर्व विधायक कौशल यादव और उनकी पत्नी पूर्णिमा यादव को पार्टी में शामिल कर लिया, जिससे दोनों परिवारों के बीच दूरी और बढ़ गई।
कानूनी जीत
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राजबल्लभ यादव को लंबे समय से चल रहे इस कानूनी विवाद से फिलहाल राहत मिल गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का निर्णय सही नहीं था, जिसके बाद अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की निगाहें हैं।