आगरा में बुधवार को ‘उदयपुर फाइल्स’ के निर्माता अमित जानी और कन्हैयालाल का परिवार पहुंचे। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर एसआरके मॉल में 300 से अधिक हिंदू युवतियों को फिल्म मुफ्त में दिखाई गई। फिल्म के बाद मॉल भारत माता, जय श्री राम और हर हर महादेव के नारों से गूंज उठा।
निर्माता अमित जानी का बयान: धमकियों के बावजूद डटे रहेंगे
फिल्म निर्माता अमित जानी ने कहा कि हिंदुस्तान में सबसे निर्मम हत्या कन्हैयालाल की हुई थी, लेकिन लोग समय के साथ ऐसी घटनाओं को भूल जाते हैं—चाहे वह पहलगाम, केरल, कश्मीर या उरी हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म को रोकने के लिए जिहादी तत्वों ने मदरसों से चंदा इकट्ठा किया।
अमित जानी ने कहा:
“मुझे लगातार ग्रेनेड और माइंस बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं,”
रक्षाबंधन पर कन्हैयालाल की पत्नी ने उन्हें राखी बांधी, जिसे वह भाई-बहन के रिश्ते की तरह मानते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि फिल्म से जो भी कमाई होगी, उसका लगभग 25% कन्हैयालाल के परिवार को दिया जाएगा।
फिल्म का मकसद आतंकवाद की जड़ों को पहचानकर उन्हें खत्म करना है।
कन्हैयालाल के बेटे का दर्द: 3 साल से नहीं मिला न्याय
कन्हैयालाल के बेटे यश साहू ने कहा,
“हम पिछले 3 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला।”
उन्होंने कहा कि फिल्म का अंत भी इसी संघर्ष को दर्शाता है और लोगों को इस मूवी को देखकर न्याय की लड़ाई में उनका साथ देना चाहिए।
यश साहू ने सरकार से अपील की कि जब कोई सच्ची घटना पर फिल्म बनाता है, तो उसे मिलने वाली धमकियों के खिलाफ सख्त कानून होना चाहिए।
भाजपा युवा मोर्चा का अभियान
भाजपा युवा मोर्चा के मंत्री गौरव राजावत ने बताया कि यह फिल्म जिहाद के खिलाफ जागरूकता फैलाने का एक अभियान है। जब तक फिल्म सिनेमाघरों में रहेगी, हिंदू युवतियों को यह मुफ्त में दिखाई जाएगी।
युवतियों का संदेश: एकजुट हों हिंदू
फिल्म देखने आई कई युवतियों ने कहा कि ‘उदयपुर फाइल्स’ जिहाद की सच्चाई को उजागर करती है और अब हिंदुओं को एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है।
स्कूल और कॉलेज की छात्राओं ने भी इस बात पर जोर दिया कि हिंदू बेटियों को जागना चाहिए और समाज की रक्षा में सक्रिय होना चाहिए।
‘उदयपुर फाइल्स’ न केवल एक फिल्म है, बल्कि यह एक संदेश भी देती है—अन्याय और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का। धमकियों और विरोध के बावजूद निर्माता अमित जानी और कन्हैयालाल का परिवार इस संघर्ष को जारी रखने के लिए दृढ़ हैं।





