BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर जिले का नयागांव इन दिनों एक अनोखी और चिंताजनक समस्या से जूझ रहा है। यहां सड़क की दुर्दशा ने गांव के दर्जनों युवाओं के लिए विवाह की राह बंद कर दी है। नतीजा यह है कि 150 परिवारों वाले इस गांव के 45 से ज्यादा युवा 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं, फिर भी वे अब तक अविवाहित हैं। वजह – गांव तक पहुंचने वाली सड़कों का बदहाल हाल और बरसात में गांव का पूरी तरह से अलग-थलग हो जाना।
सड़क की कमी ने बंद की रिश्तों की राह
नयागांव, भितरवार तहसील के अंतर्गत आता है। यहां की सबसे बड़ी समस्या है – गांव तक आने-जाने के लिए कोई पक्की और सुलभ सड़क न होना। गांव में दो रास्ते हैं, लेकिन दोनों ही या तो कच्चे हैं या बरसात के दिनों में जलमग्न हो जाते हैं। जब भी कोई रिश्ता तय करने की बात आती है, तो लड़की वाले गांव पहुंचने से कतराते हैं। यही वजह है कि कई युवाओं की उम्र निकल गई, लेकिन विवाह का कोई प्रस्ताव नहीं आया।
ग्रामीणों के संघर्ष: आंदोलन, बहिष्कार और फिर भी सन्नाटा
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर कई बार आवाज़ उठाई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत एक लंबा रास्ता जरूर बना, लेकिन वह गांव की जरूरत को पूरा नहीं करता। स्थानीय नेताओं से गुहार लगाने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। हाल ही में विधानसभा चुनाव 2023 में गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार भी किया था, लेकिन उसके बाद भी कोई नेता यहां झांकने तक नहीं आया।
बरसात में गांव बन जाता है टापू
गांव के निवासी हरिओम कुशवाह ने बताया कि बरसात के मौसम में तीन महीने के लिए नयागांव का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। एंबुलेंस गांव में नहीं आ पाती, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और इलाज के अभाव में कई लोगों की मौत तक हो चुकी है। गांव के रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं, जिससे बाहर से कोई आने को तैयार नहीं होता – न रिश्तेदार, न दूल्हन के पिता।
घर-घर में कुंवारे, लेकिन कोई रिश्ता नहीं
नयागांव के लगभग हर घर में एक युवक ऐसा है जिसकी उम्र शादी लायक हो चुकी है, लेकिन कोई रिश्ता नहीं आ रहा। गांव के एक युवक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा,
“हम जैसे कई लड़के 40 की उम्र पार कर चुके हैं। कुछ रिश्ते आए भी, लेकिन जैसे ही लड़की वाले गांव की स्थिति देखते हैं, बिना कुछ कहे वापस लौट जाते हैं।”
जलसत्याग्रह तक कर चुके हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर जलसत्याग्रह जैसा कदम भी उठाया। उन्होंने बारिश के पानी से भरे गड्ढों में खड़े होकर प्रदर्शन किया, लेकिन शासन-प्रशासन की नींद आज तक नहीं टूटी। यह विडंबना है कि सड़क जैसी बुनियादी जरूरत के अभाव में न केवल विकास रूका है, बल्कि युवाओं का व्यक्तिगत जीवन भी अधूरा रह गया है।
क्या कहता है प्रशासन?
प्रशासन की ओर से इस मसले पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। चुनावों से पहले हर बार नेताओं द्वारा आश्वासन दिया जाता है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही नेता नयागांव की सुध तक नहीं लेते।
एक सड़क का अभाव, एक पीढ़ी का अकेलापन
नयागांव की कहानी सिर्फ अधूरी सड़कों की नहीं, अधूरे सपनों और उम्मीदों की भी है। यहां के युवाओं का भविष्य सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है। अगर समय रहते इस गांव को सड़क से जोड़ा नहीं गया, तो यह न केवल विकास से कट जाएगा, बल्कि समाज में एक ऐसा उदाहरण बन जाएगा जहां सरकारी उपेक्षा ने पूरे गांव की पीढ़ी को कुंवारा बना डाला।





