BY: YOGANAND SHRIVASTVA
ग्वालियर। ग्वालियर शहर की नई बनी चेतकपुरी महल रोड बार-बार धंसती जा रही है और अब यह मामला तूल पकड़ने लगा है। पिछले 12 दिनों में 10 बार सड़क का धंसना प्रशासन के लिए शर्मनाक बन चुका है। नगर निगम ने आखिरकार कार्रवाई करते हुए पीआईयू नगर निगम से जुड़े दो कार्यपालन यंत्री — पवन सिंघल और सुरेश अहिरवार को निलंबित कर दिया है। यह निर्देश जल संसाधन एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने दिए, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सिलावट खुद इस बार-बार धंसती सड़क का निरीक्षण करने अब तक नहीं पहुंचे हैं, जबकि उन्होंने शहर की अन्य छह सड़कों का निरीक्षण किया।
‘आप’ का विरोध, सीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन
शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ग्वालियर दौरे पर रहेंगे। इस दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष अमिताभ पांडे के नेतृत्व में सीएम का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की बर्बादी और जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ है। ‘आप’ कार्यकर्ता सीएम को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग करेंगे।
मंत्री का निरीक्षण… पर चेतकपुरी रोड छूटी!
गौरतलब है कि प्रभारी मंत्री सिलावट शुक्रवार से ग्वालियर प्रवास पर हैं। उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के साथ शहर की छह प्रमुख सड़कों — सिटी सेंटर, पटेल नगर, सिंधिया कन्या स्कूल, बैजाताल आदि का निरीक्षण किया, लेकिन चेतकपुरी रोड, जो कि पिछले 12 दिनों में 10 बार धंस चुकी है, वहां तक जाने की जहमत नहीं उठाई। पूछे जाने पर उन्होंने बस इतना कहा कि वे शनिवार को उस जगह का निरीक्षण करेंगे।
इंजीनियर सस्पेंड, पर ठेकेदार को क्लीन चिट?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि नगर निगम प्रशासन ने निर्माण कार्य में शामिल इंजीनियरों को तो सस्पेंड कर दिया, लेकिन ठेकेदार पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि तकनीकी जानकार और स्थानीय लोग बार-बार कह रहे हैं कि सड़क का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया।
नगर निगम ने स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम का काम कर रही जैन एंड राय कंपनी को 12 करोड़ रुपए और सड़क निर्माण का काम कर रही एचएनएस कंपनी को 2 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। जबकि पूरे प्रोजेक्ट की लागत थी:
- स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज का ठेका: ₹14.50 करोड़
- रोड निर्माण का ठेका: ₹4.09 करोड़
सड़क बार-बार धंसने के पीछे ये हैं 3 बड़ी वजहें
विशेषज्ञों की माने तो चेतकपुरी रोड के बार-बार धंसने के पीछे ये तीन बड़ी तकनीकी गलतियां हैं:
- गलत मिट्टी से भराव: पाइपलाइन डालने के बाद खोदी गई सड़क को चिकनी मिट्टी से भर दिया गया, जबकि तकनीकी रूप से मुरम से भराव होना चाहिए था।
- कमजोर कुटाई: मिट्टी भरने के बाद केवल रोलर चलाया गया। जबकि कुटाई के लिए वाइब्रेटिंग रोलर का प्रयोग जरूरी था ताकि 98% कंपैक्शन मिल सके।
- जल निकासी की चूक: सड़क बनने से पहले पानी गिरने से मिट्टी जम जाती, लेकिन उसे नजरअंदाज कर जल्दबाजी में सड़क बिछा दी गई, जो बाद में धंसने लगी।
जानिए प्रोजेक्ट का पूरा स्कोप
- प्रोजेक्ट नाम: स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम
- कुल लागत: ₹18.31 करोड़
- स्वीकृत टेंडर राशि: ₹14.50 करोड़
- निर्माण पूरा होने की समय-सीमा: अगस्त 2024
- पाइप साइज: 2000 मिमी
- गहराई: 4 से 7 मीटर
- सड़क का क्षेत्र: कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौपाटी तक 2800 मीटर लंबाई
जनता का सवाल: दोषियों को बचाया क्यों जा रहा है?
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब इंजीनियरों को लापरवाही के लिए निलंबित किया जा सकता है, तो ठेकेदार को क्यों छोड़ा गया? ठेकेदार द्वारा घटिया काम करने के बावजूद अब तक उस पर कोई पेनाल्टी, एफआईआर या ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया नहीं शुरू हुई।
जब राजनीति, प्रशासन और निर्माण का गठजोड़ हो जाए…
ग्वालियर की चेतकपुरी सड़क का मामला बताता है कि जब प्रशासनिक निगरानी कमजोर होती है और निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता को ताक पर रख दिया जाता है, तो करोड़ों की लागत से बनी सड़कें 10 दिन भी नहीं टिकतीं। आम आदमी पार्टी और स्थानीय लोगों की नाराजगी स्वाभाविक है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेते हैं — क्या सिर्फ ‘निलंबन’ से काम चल जाएगा या ठेकेदार पर भी गिरेगा गाज?





