भोपाल से दिल्ली जा रही सुपरफास्ट शताब्दी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12001) बुधवार शाम को दो बार पथराव की चपेट में आ गई। पहली घटना दतिया के पास और दूसरी ग्वालियर स्टेशन पर हुई। इन हमलों में कोच C-3 की खिड़कियों के शीशे टूट गए और ट्रेन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कब और कहां हुई घटना?
- समय: बुधवार शाम लगभग 7:30 बजे
- पहली घटना: दतिया के पास, ट्रेन झांसी से ग्वालियर की ओर जा रही थी
- दूसरी घटना: ग्वालियर स्टेशन पर
- प्रभावित कोच: C-3
- यात्रियों को नुकसान: कोई घायल नहीं हुआ
पहली बार जब ट्रेन दतिया के पास पहुंची, तो अचानक पत्थरों की बौछार होने लगी। हमले में कोच C-3 की कई खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए। उसके बाद, ग्वालियर स्टेशन पर पहुंचने पर दोबारा पथराव किया गया।
यात्रियों की प्रतिक्रिया: डर और तनाव
घटना इतनी अचानक हुई कि यात्री कुछ समझ ही नहीं पाए। कई यात्रियों ने बताया कि वे डर के मारे अपनी सीटों के नीचे छिप गए। ट्रेन में सफर कर रहे मुरैना के पूर्व विधायक रघुराज सिंह कंसाना भी इस खौफनाक घटना के गवाह बने।
“हम कुछ समझ ही नहीं पाए, बस शीशे टूटने की आवाज आई और लोग इधर-उधर भागने लगे,” – एक यात्री ने बताया।
जीआरपी की त्वरित कार्रवाई
ग्वालियर स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन रुकी, Government Railway Police (GRP) के जवान ट्रेन में चढ़े और यात्रियों से घटना की जानकारी ली। सभी यात्रियों से पूछताछ के बाद ट्रेन को कुछ समय बाद नई दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया।
सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ यह शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेन है, दूसरी ओर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक गंभीर चिंता का विषय है।
जरूरी सवाल जो उठ रहे हैं:
- इन हमलों के पीछे कौन लोग हैं?
- एक ही दिन दो जगहों पर हमला क्यों हुआ?
- रेलवे भविष्य में ऐसी घटनाओं से कैसे निपटेगा?
रेलवे और स्थानीय प्रशासन को इस घटना की गहराई से जांच करनी चाहिए और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
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भोपाल-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पर हुए पथराव की ये दो घटनाएं रेलवे सुरक्षा पर एक गंभीर चेतावनी हैं। सौभाग्य से किसी को शारीरिक चोट नहीं पहुंची, लेकिन यात्रियों का मनोबल जरूर प्रभावित हुआ है। यह आवश्यक है कि रेलवे सुरक्षा को और मज़बूत करे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।





