राहुल गांधी के ‘लंगड़े घोड़े’ बयान पर विवाद, दिव्यांगजन बोले – कार्रवाई नहीं हुई तो करेंगे आंदोलन

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BY: Yoganand Shrivastava

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दिया गया “लंगड़े घोड़े” वाला बयान अब राजनीतिक और सामाजिक विवाद का कारण बन गया है। मध्य प्रदेश समेत देशभर के दिव्यांगजन संगठनों ने इस बयान को अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि राहुल गांधी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे सड़क से संसद तक आंदोलन करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं की तुलना “रेस के घोड़े”, “बारात के घोड़े” और “लंगड़े घोड़े” से की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी में काम करने वाले और न करने वाले नेताओं को पहचान कर उनकी भूमिका तय की जाएगी।

उनके इस बयान में “लंगड़े घोड़े” शब्द का इस्तेमाल ऐसे नेताओं के लिए किया गया, जो पार्टी में निष्क्रिय या अव्यवस्थित हैं। लेकिन इस शब्द चयन को लेकर दिव्यांग समुदाय ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान पर हमला करार दिया है।

दिव्यांगजन नाराज़, की कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश दिव्यांग खेल समिति ने इस टिप्पणी को दिव्यांगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पद्मश्री से सम्मानित पैरा एथलीट्स सहित कई दिव्यांग खिलाड़ी भोपाल में राज्य के खेल मंत्री विश्वास सारंग के निवास पर पहुंचे और राहुल गांधी के खिलाफ ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान दिव्यांगजनों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि इस मामले में कांग्रेस नेता से माफी नहीं मांगी गई और कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे देशव्यापी आंदोलन करेंगे। उनकी मांग है कि इस तरह के अपमानजनक शब्दों का सार्वजनिक मंचों से उपयोग बंद किया जाए।

सिंधिया और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी राहुल गांधी के बयान की निंदा की है और इसे दिव्यांगजनों के लिए अपमानजनक बताया है। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नेता से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती, जो समाज के विशेष वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाए।

राहुल गांधी का पूरा बयान क्या था?

राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था:

“रेस के घोड़े और बारात के घोड़े को अलग करना ही पड़ेगा। कभी-कभी कांग्रेस पार्टी रेस के घोड़े को बारात में भेज देती है और बारात के घोड़े को रेस में खड़ा कर देती है, जो चाबुक खाते ही बैठ जाता है। लेकिन तीसरी कैटेगरी है — लंगड़ा घोड़ा। उसे घास-पानी दो, रिटायर करो और बाकी घोड़ों को डिस्टर्ब मत करने दो। वरना कार्रवाई करनी पड़ेगी।”

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लेखक: गोविंद सिंह राजपूत, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री International