नेपाल में राजशाही समर्थकों का प्रदर्शन, पूर्व गृह मंत्री कमल थापा सहित गिरफ्तार

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राजशाही समर्थक आंदोलन

नेपाल की राजधानी काठमांडू में हाल ही में राजशाही समर्थकों का प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया है। राजशाही बहाली और नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग के चलते हुए इस प्रदर्शन में पूर्व गृह मंत्री कमल थापा समेत करीब छह नेताओं को गिरफ्तार किया गया। इस खबर में जानिए विरोध प्रदर्शन की वजह, घटनाक्रम और आगे की संभावनाएं।


नेपाल में राजशाही बहाली की मांग तेज

पिछले कुछ दिनों से नेपाल में राजशाही समर्थकों का आंदोलन तेजी पकड़ रहा है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP), RPP नेपाल और अन्य राजशाही समर्थक संगठन नारायणचौर में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका मुख्य एजेंडा है:

  • नेपाल में राजशाही को पुनर्स्थापित करना
  • देश को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करना

इस आंदोलन का प्रभाव राजधानी काठमांडू के प्रमुख हिस्सों पर भी दिख रहा है, खासकर नारायणहिटी पैलेस के आसपास।


काठमांडू के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने का प्रयास और गिरफ्तारी

राजशाही समर्थकों ने काठमांडू के प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश की कोशिश की, जिसमें पूर्व गृह मंत्री कमल थापा और करीब छह अन्य लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

  • ये प्रदर्शनकारी नारायणहिती पैलेस संग्रहालय क्षेत्र में घुसने का प्रयास कर रहे थे।
  • काठमांडू घाटी पुलिस के प्रवक्ता एपिल बोहोरा ने बताया कि आरपीपी के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगडेन ने विरोध का नेतृत्व किया।
  • जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेराबंदी तोड़ी और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास बलुवाटर की ओर बढ़ने की कोशिश की, तब पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई।


प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी और सरकार पर तीखा प्रहार

राजशाही समर्थकों ने नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की तस्वीरें लेकर जोरदार नारेबाजी की। उनका कहना है कि:

  • “जब तक राजशाही को फिर से स्थापित नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।”
  • वे वर्तमान सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री पी. ओली की नीतियों के विरोधी हैं।
  • लगभग 1,200 प्रदर्शनकारी गणतंत्र व्यवस्था के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतरे।

यह विरोध प्रदर्शन काठमांडू के राजनीतिक माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना रहा है।


नेपाल में राजशाही बहाली की पृष्ठभूमि

नेपाल ने 2008 में राजशाही को खत्म कर गणतंत्र घोषित किया था। लेकिन कई राजशाही समर्थक आज भी इसे वापस लाने की मांग करते हैं। उनकी मुख्य बातें हैं:

  • राजशाही को हिंदू राष्ट्र के रूप में पुनर्स्थापित करना।
  • मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से असंतोष।
  • देश में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की मांग।

यह आंदोलन नेपाल की आंतरिक राजनीति में नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है।


काठमांडू में सुरक्षा व्यवस्था सख्त

राजशाही समर्थकों के इस विरोध के चलते काठमांडू में नारायणहिटी पैलेस और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

  • भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षाबल तैनात हैं।
  • प्रदर्शन और जनसभाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  • प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से कई स्थानों को सील भी किया है।

इससे राजधानी में शांति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।


निष्कर्ष: नेपाल की राजनीतिक स्थिरता पर असर

राजशाही समर्थकों का यह आंदोलन नेपाल की राजनीतिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

  • सरकार को इस चुनौती का शांतिपूर्ण समाधान ढूंढ़ना होगा।
  • प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के साथ सड़कों पर बने रह सकते हैं।
  • भविष्य में राजशाही बहाली की मांगों को लेकर और भी बड़े आंदोलन हो सकते हैं।

नेपाल की जनता और राजनीतिक दल इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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