नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के न्यायपालिका पर तीखे बयानों के जवाब में वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी तीखा प्रतिक्रिया दी है।
पिछले हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार आदेश दिया कि राष्ट्रपति को राज्यपाल द्वारा आरक्षित किए गए विधेयकों पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा। इस पर धनखड़ ने कहा कि न्यायपालिका अपनी सीमाओं को पार कर रही है। उन्होंने अनुच्छेद 142 को “लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ परमाणु मिसाइल” बताया।
सिब्बल ने इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया
कपिल सिब्बल ने 1975 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को याद किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “जब इंदिरा गांधी के चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, तो सिर्फ एक जज (जस्टिस कृष्णा अय्यर) ने फैसला सुनाया और उन्हें पद से हटा दिया गया। उस समय धनखड़ जी को यह स्वीकार्य था, लेकिन अब सरकार के खिलाफ दो जजों की बेंच का फैसला सवालों के घेरे में है?”
“राष्ट्रपति केवल एक संवैधानिक प्रमुख हैं”
सिब्बल ने कहा कि उन्हें उपराष्ट्रपति के बयान पर हैरानी हुई। उन्होंने कहा, “अगर कोई संस्था है जिस पर आज भी देशभर के लोगों का भरोसा है, तो वह न्यायपालिका है। राष्ट्रपति केवल एक संवैधानिक प्रमुख हैं, वे मंत्रिमंडल की सलाह पर ही कार्य करते हैं। धनखड़ जी को यह जानना चाहिए।”
धनखड़ का आरोप – “जज सुपर पार्लियामेंट बन रहे हैं”
धनखड़ ने आरोप लगाया कि कुछ जज “विधायिका और कार्यपालिका की भूमिका निभा रहे हैं”। उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों पर रोक लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से फैसला लेने के लिए कहा जा रहा है, और अगर वे नहीं करते हैं, तो यह कानून बन जाएगा। क्या हम ऐसे जज चाहते हैं जो कानून बनाएं, कार्यपालिका का काम करें और सुपर पार्लियामेंट बन जाएं?”

सिब्बल का जवाब – “संविधान की जानकारी होनी चाहिए”
सिब्बल ने कहा कि उपराष्ट्रपति को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, “धनखड़ जी पूछते हैं कि राष्ट्रपति के अधिकारों को कैसे सीमित किया जा सकता है, लेकिन कौन सीमित कर रहा है? अगर कोई मंत्री राज्यपाल के पास जाकर जनहित के मुद्दे उठाता है, तो क्या राज्यपाल उन्हें नजरअंदाज कर सकता है?”
क्या है पूरा मामला?
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपालों द्वारा रोके गए विधेयकों पर राष्ट्रपति को तीन महीने में फैसला लेने का आदेश दिया।
- धनखड़ ने कहा कि न्यायपालिका अनुच्छेद 142 का गलत इस्तेमाल कर रही है।
- सिब्बल ने जवाब में 1975 के इंदिरा गांधी केस का उदाहरण दिया।
अब क्या?
यह बहस न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सीमाओं को लेकर चल रही है। देखना होगा कि आगे क्या होता है।




