ED की छापेमारी: तमिलनाडु के अफसरों और कंपनी के बीच करोड़ों की साजिश!

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तमिलनाडु में 30 करोड़ रुपये के एक बड़े बैंक घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में न केवल वित्तीय धोखाधड़ी सामने आई है, बल्कि राज्य के नगर प्रशासन विभाग में गहरी पैठी भ्रष्टाचार की साजिश का भी पता चला है।

यह कार्रवाई Truedom EPC India Pvt Ltd नामक कंपनी के खिलाफ की गई है, जिस पर फर्जी तरीके से बैंक लोन हासिल करने और उसे दूसरे उद्देश्यों में उपयोग करने का आरोप है।


तीन शहरों में एक साथ छापेमारी

7 अप्रैल को ईडी ने चेन्नई, त्रिची और कोयंबटूर में कंपनी और उसके अधिकारियों से जुड़ी 15 जगहों पर छापे मारे। यह कार्रवाई 2002 के मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई, जो कि CBI द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर की गई थी।


फर्जी कंपनी, फर्जी प्रोजेक्ट और लोन की लूट

जांच में सामने आया कि Truedom EPC India Pvt Ltd ने 100.8 मेगावॉट के पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट का झांसा देकर इंडियन ओवरसीज बैंक से भारी-भरकम लोन लिया। लेकिन कंपनी के पास न तो कोई तकनीकी अनुभव था और न ही कोई असली प्रोजेक्ट।

लोन मिलते ही पैसा कई शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए घुमाया गया। इसमें से बड़ी रकम True Value Homes Pvt Ltd और TVH Energy Resources Pvt Ltd को ट्रांसफर की गई, जहां इसका इस्तेमाल पुराने कर्ज चुकाने में किया गया — यानी असली लोन का कोई उपयोग ही नहीं हुआ।


फर्जी दस्तावेज़ और नकली लेनदेन का खुलासा

ईडी ने छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में जाली दस्तावेज, नकली प्रोजेक्ट एग्रीमेंट्स, और जटिल फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस की जानकारी हासिल की। ये सब लेन-देन इस तरह से किए गए थे कि असली पैसा कहां गया, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाए।

इस साजिश में मुख्य रूप से दो लोगों के नाम सामने आए हैं — एन. रविचंद्रन और अरुण नेहरू — जिन्हें इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

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नगर प्रशासन विभाग में भी भ्रष्टाचार का जाल

जांच के दौरान ईडी को एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ — तमिलनाडु नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग (MAWS) में भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क।

ईडी के अनुसार, इस विभाग में टेंडर पहले से तय किए जाते थे, कमीशन फिक्स होता था, और इसमें सरकारी अधिकारी, बिचौलिए और राजनीतिक रूप से जुड़े लोग शामिल थे।

यह भी सामने आया कि सरकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले में रिश्वत ली जा रही थी, और यह पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए इधर-उधर भेजा जाता था।


गैरकानूनी संपत्तियों की पहचान शुरू

ईडी ने उन संपत्तियों की पहचान शुरू कर दी है जो इस घोटाले से कमाई गई अवैध कमाई (Proceeds of Crime) से खरीदी गई हैं। अब इन संपत्तियों को PMLA के तहत जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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