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मध्य प्रदेश में ‘मोहनराज’, ‘सिंहासन बत्तीसी’ जैसा काज !

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'Mohanraj', 'Singhasan Battisi' like work in Madhya Pradesh!

विक्रमोत्सव 30 मार्च को गुड़ी पड़वा के दिन से प्रारंभ होगा

BY: Vijay Nandan

 सत्यं च कर्म च सदा, परोपकारः सदा।

नित्यं च धर्मः सदा, सदा च सत्यम्।।

ये श्लोक सम्राट विक्रमादित्य के शासन से संबंधित माना जाता है। श्लोक उनके शासन की नीतियों और उनके पालन किए गए सिद्धांतों को व्यक्त करता है। सम्राट विक्रमादित्य के शासन में सत्य, धर्म, परोपकार, और निष्ठा की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके शासन का आदर्श न्याय, समानता, और समृद्धि के सिद्धांतों पर आधारित था, जो उनके शासन के दौरान समाज में प्रचलित थे।

स्पेशल रिपोर्ट में आज हम उस महान गौरवशाली शासन व्यवस्था की यात्रा पर लेकर जा रहे हैं..जो 2 हजार साल से भी अधिक पुरानी है.. मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार “विरासत से विकास” के ध्येय को साकार करने में जुटी है, जिसके तहत अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 125 दिनी विक्रमोत्सव के अंतर्गत 12, 13 और 14 अप्रैल 2025 को दिल्ली में सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित भव्य आयोजन हो रहा है, जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों को आमंत्रित किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार की कोशिश है कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन की मिसाल जन-जन तक पहुंचे। इस प्रकल्प के माध्यम से प्रदेश में उनके गौरवशाली इतिहास को ना सिर्फ याद किया जाएगा, बल्कि वैसी ही शासन व्यवस्था प्रदेश में स्थापित करने के प्रयास भी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह प्रयास कितना सफल होगा, यह आने वाले समय में साफ होगा। सिस्टम इस विजन को कितना सपोर्ट करेगा, और आम लोग इसे किस दृष्टिकोण से लेंगे, यह भी स्पष्ट होगा। इस मुद्दे पर विपक्ष की राय क्या है, इतिहासकारों का इस पर क्या नजरिया है, इसे लेकर एक पैनल हमारे साथ चर्चा में शामिल है..

जी हां आप सही समझे…ये वीडियो लगभग 2 हजार साल पुरानी उस शासन व्यवस्था और राजा का नाट्य रूपांतरण और चित्रण है …जिसका अपना लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है..आज हम आपको उसी ऐतिहासिक यात्रा पर लेकर जा रहे हैं..जहाँ सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली शासन को फिर से जीवित करने का प्रयास हो रहा है। यह प्रयास मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से किया जा रहा है, और इस यात्रा का नाम है विक्रमोत्सव।

सम्राट विक्रमादित्य का शासन भारतीय इतिहास में एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उनके शासन में 32 पुतलियों की व्यवस्था उनके प्रशासनिक कौशल और न्यायप्रियता का प्रतीक थी। इन पुतलियों का कार्य शासन के विभिन्न पहलुओं की देखरेख करना था। प्रत्येक पुतली को एक विशेष कार्य सौंपा गया था, ताकि प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता और समाज के प्रत्येक वर्ग की भलाई सुनिश्चित की जा सके। ये पुतलियां सम्राट के आदेशों को लागू करती थीं और उन्हें स्थानीय स्तर पर नीतियां लागू करने का कार्य सौंपा जाता था। जैसे..

GFX विक्रमादित्य की 32 पुतलियां

  1. न्याय पुतली

न्याय प्रणाली के संचालन और अदालतों में निष्पक्षता सुनिश्चित करना।

  • कर पुतली

कर वसूली और कर संबंधी नीतियों का संचालन।

  • सुरक्षा पुतली

साम्राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शांति व्यवस्था बनाए रखना।

  • संचार पुतली

साम्राज्य में सूचना के आदान-प्रदान और संदेशों के संचालन की जिम्मेदारी।

  • शिक्षा पुतली

शिक्षा और ज्ञान के प्रसार के लिए नीतियां बनाना और लागू करना।

  • विपणन पुतली

व्यापार, बाजार और आर्थिक गतिविधियों का संचालन और निगरानी।

  • सामाजिक कल्याण पुतली

गरीबों, वृद्धों और विकलांगों के कल्याण के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन।

  • वाणिज्य पुतली

व्यापारिक गतिविधियों और वाणिज्यिक नीतियों का संचालन।

  • अर्थशास्त्र पुतली

साम्राज्य के आर्थिक विकास और संपत्ति के उचित वितरण की जिम्मेदारी।

  1. धार्मिक पुतली

विभिन्न धर्मों के प्रति सहिष्णुता बनाए रखना और धार्मिक कार्यों का संचालन।

  1. सैन्य पुतली

सेना की भर्ती, प्रशिक्षण और सामरिक अभियानों की योजना बनाना।

  1. विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ पुतलियां

स्वास्थ्य, कला, विज्ञान, साहित्य, आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए पुतलियां थीं जो उस क्षेत्र में विशेष नीतियों का संचालन करती थीं।

  1. शासन पुतली

साम्राज्य के शासन संचालन और सम्राट के आदेशों को लागू करने की जिम्मेदारी।

  1. कृषि पुतली

कृषि के उत्थान और किसानों की भलाई के लिए नीतियां बनाना।

  1. जल पुतली

जल संसाधनों के प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था की देखरेख।

  1. बच्चों की देखभाल पुतली

बच्चों के कल्याण, उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी नीतियों की देखरेख।

  1. स्थानीय प्रशासन पुतली

विभिन्न क्षेत्रों और गांवों का प्रशासन और सरकारी आदेशों को लागू करना।

  1. सांसद पुतली

साम्राज्य की नीतियों और कानूनों का निर्माण और संशोधन।

  1. संस्कृति पुतली

कला, संगीत, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों का संवर्धन।

  • नदी और पर्यावरण पुतली

जलवायु, पर्यावरण और नदियों के संरक्षण की जिम्मेदारी।

  • विभिन्न प्रमुख नगरों के लिए पुतलियां

प्रमुख शहरों और नगरों के प्रशासन की देखरेख।

  • मुद्रण पुतली

सिक्कों की ढलाई और मुद्रा प्रणाली का संचालन।

23. नौकरशाही पुतली

प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और कार्यकुशलता।

  • नौका पुतली

समुद्री सुरक्षा और समुद्री मार्गों का प्रबंधन।

  • श्रम और श्रमिक पुतली

श्रमिकों की भलाई और उनके अधिकारों की रक्षा।

  • उधारी पुतली

उधारी और ऋण व्यवस्थाओं की देखरेख।

  • अवैध गतिविधि पुतली

अपराध और अवैध गतिविधियों की निगरानी और दमन।

  • खगोलशास्त्र पुतली

खगोलशास्त्र और विज्ञान के क्षेत्र में विकास और अनुसंधान।

  • शिक्षकों की देखभाल पुतली

शिक्षकों की स्थिति और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए नीति निर्धारण।

  • संचार पुतली

साम्राज्य के भीतर और बाहर के संचार व्यवस्था की देखरेख।

  • स्वास्थ्य पुतली

साम्राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन और सुधार।

  • राजदूत पुतली
  • विदेशी राजनयिक संबंधों और कूटनीति का प्रबंधन।

मध्य प्रदेश सरकार इस गौरवशाली विरासत को विकास के मार्ग पर लेकर आ रही है..मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य के आदर्शों को पुनः स्थापित करने का संकल्प दौहराते हैं. तो लगता है कि मोहन कैबिनेट में भी 32 मंत्री हैं, जो अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी संभालते हैं, ठीक वैसे ही जैसे विक्रमादित्य की 32 पुतलियां प्रशासन के विभिन्न पहलुओं की देखरेख करती थीं।

लेकिन इस प्रयास को लेकर विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विपक्षी नेता इसे एक राजनीतिक प्रयास मानते हैं, और उनका कहना है कि सरकार को पहले राज्य में बढ़ते मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

  • एमपी में सीएम मोहन का नव विचार
  • शासन की गौरवशाली विरासत आधार
  • सम्राट विक्रमादित्य जैसा हो शासन !
  • ‘सिंहासन 32सी’ जैसे मोहन के 32 मंत्री  
  • विपक्ष बोला बस बहुत हो गया सरकार

देश भर में विक्रमोत्सव मनाना एक अच्छा विचार है..लेकिन विपक्ष कहता है कि क्या यह जनता के असल मुद्दे बेरोजगारी, शिक्षा स्वास्थ से ध्यान भटकाने का एक तरीका नहीं है? विपक्ष के आरोप अपनी जगह सही हो सकते हैं.. लेकिन एक गौरवशाली शासन व्यवस्था को फिर से स्थापित करने में कोई बुराई तो नहीं है..इसका उद्देश्य भी राज्य में रोजगार को बढ़ावा देना..लोगों को प्राचीन व्यवस्था से अवगत करा कर प्रदेश का विकास करना है. इस प्रकल्प से हमारे जड़े मजबूत होती हैं तो इसकी सराहना होनी चाहिए.

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