विश्व युद्ध तृतीय एक ऐसा विषय है, जो आज की दुनिया में अक्सर चर्चा का केंद्र बनता है। पिछले दो विश्व युद्धों (1914-1918 और 1939-1945) ने मानव इतिहास को गहरे रूप से प्रभावित किया था। आज, 21वीं सदी में तकनीकी प्रगति, परमाणु हथियारों का प्रसार, और विभिन्न देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तीसरे विश्व युद्ध की संभावना समय-समय पर बहस का मुद्दा बनती है। आइये इस लेख में जानते है वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अगर विश्व युद्ध हुआ तो विश्व में क्या प्रभाव पड़ेगा। साथ ही जानेंगे हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच हुई तनातनी किस प्रकार विश्व की तरफ इशारा कर रही है।

वर्तमान वैश्विक तनाव: संभावित उत्प्रेरक
आज की दुनिया में कई क्षेत्रीय और वैश्विक संघर्ष ऐसे हैं, जो तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत का कारण बन सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख तनाव बिंदु निम्नलिखित हैं:
- रूस-यूक्रेन संकट: 2022 में शुरू हुआ यह संघर्ष अभी भी जारी है। रूस और नाटो देशों (विशेष रूप से अमेरिका) के बीच बढ़ती दुश्मनी एक बड़े युद्ध का कारण बन सकती है। हाल ही में 28 फरवरी, 2025 को व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रम्प और वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच हुई तीखी बहस ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। यह बैठक, जो यूक्रेन के खनिज संसाधनों पर एक समझौते के लिए थी, चिल्लाहट और अपमान में बदल गई। ट्रम्प ने ज़ेलेंस्की को “अमेरिका के प्रति कृतज्ञता न दिखाने” के लिए फटकार लगाई और उन्हें चेतावनी दी कि “या तो समझौता करो, वरना हम बाहर हैं।” इस घटना ने अमेरिका-यूक्रेन संबंधों में दरार को उजागर किया और रूस के साथ शांति वार्ता को जटिल बना दिया। यदि यह संकट अनियंत्रित हुआ, तो परमाणु हथियारों का प्रयोग भी संभव है।
- चीन-ताइवान तनाव: चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी ताइवान की संप्रभुता का समर्थन करते हैं। यदि चीन ने ताइवान पर सैन्य हमला किया, तो यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ एक बड़े युद्ध को जन्म दे सकता है।
- ईरान और मध्य पूर्व की अस्थिरता: ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इज़राइल के साथ उसका तनाव मध्य पूर्व में एक बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है। यदि सऊदी अरब, अमेरिका और रूस जैसे बड़े देश इसमें शामिल हुए, तो यह वैश्विक स्तर पर फैल सकता है।
- उत्तर कोरिया का खतरा: उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण और दक्षिण कोरिया-अमेरिका के साथ उसका तनाव भी एक उत्प्रेरक बन सकता है।
- साइबर युद्ध और तकनीकी खतरे: आज के युग में युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। साइबर हमले, जैसे कि बिजली ग्रिड को ठप करना या वित्तीय प्रणालियों को नष्ट करना, भी युद्ध की शुरुआत कर सकते हैं।
किस प्रकार हो सकती है विश्व युद्ध III की शुरुआत
मान लीजिए कि 2026 में रूस द्वारा यूक्रेन में एक बड़े पैमाने पर परमाणु हथियार का प्रयोग होता है, जिसके जवाब में नाटो सैन्य कार्रवाई शुरू करता है। ट्रम्प-ज़ेलेंस्की विवाद के बाद यदि अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य सहायता बंद कर दी, तो यूक्रेन कमज़ोर पड़ सकता है, जिससे रूस को बढ़त मिल सकती है। इसी बीच, चीन ताइवान पर हमला कर देता है, और अमेरिका, अपने सहयोगियों जापान और दक्षिण कोरिया के साथ, जवाबी कार्रवाई करता है। जल्द ही, यह संघर्ष दो मोर्चों पर फैल जाता है: यूरोप और एशिया।
- पहला चरण: परंपरागत युद्ध
शुरुआत में, देश अपनी सेनाओं, नौसेनाओं और वायुसेनाओं का उपयोग करते हैं। यूरोप में रूस और नाटो देशों के बीच भयंकर लड़ाई होती है, जबकि प्रशांत महासागर में अमेरिका और चीन की नौसेनाएँ आमने-सामने होती हैं। ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित हथियारों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। - दूसरा चरण: साइबर और आर्थिक युद्ध
युद्ध के साथ ही साइबर हमले शुरू हो जाते हैं। रूस अमेरिका के बिजली ग्रिड को निशाना बनाता है, जबकि चीन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करता है। भारत जैसे तटस्थ देश भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं, क्योंकि तेल और गैस की आपूर्ति रुक जाती है। - तीसरा चरण: परमाणु युद्ध का खतरा
जब कोई भी पक्ष जीतता नजर नहीं आता, तो परमाणु हथियारों का प्रयोग शुरू होता है। छोटे पैमाने के परमाणु हमले पहले होते हैं, लेकिन जल्द ही बड़े शहर जैसे न्यूयॉर्क, मॉस्को और बीजिंग नष्ट हो जाते हैं। इससे वैश्विक तबाही शुरू हो जाती है।
भारत की भूमिका
भारत, जो अपनी तटस्थता और रणनीतिक स्थिति के लिए जाना जाता है, इस युद्ध में शामिल होने से बचने की कोशिश करता है। हालांकि, यदि चीन ने भारत के साथ सीमा पर आक्रमण किया, तो भारत को युद्ध में उतरना पड़ सकता है। भारत की शक्तिशाली सेना और परमाणु क्षमता इसे एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना सकती है।
संभावित परिणाम
- मानवीय क्षति: करोड़ों लोग मारे जाते हैं, और अरबों लोग विस्थापित हो जाते हैं।
- पर्यावरणीय विनाश: परमाणु विस्फोटों से “न्यूक्लियर विंटर” की स्थिति बन सकती है, जिसमें सूरज की रोशनी धरती तक नहीं पहुँचती, जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं।
- नई विश्व व्यवस्था: युद्ध के बाद, जीवित देश एक नई वैश्विक व्यवस्था स्थापित करते हैं, जिसमें संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ या तो समाप्त हो जाती हैं या पूरी तरह बदल जाती हैं। ट्रम्प-ज़ेलेंस्की विवाद के बाद अमेरिका की नाटो और यूरोपीय सहयोगियों के साथ नीतियाँ भी बदल सकती हैं।