तमिलनाडु में हंगामा: क्या शाह की यात्रा बन जाएगी आग में घी?

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
amit shah with stalin

तमिलनाडु एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 26 फरवरी 2025 से शुरू होने वाली तीन दिवसीय यात्रा ने राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं और केंद्र सरकार与 द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) की मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार के बीच दरार को गहरा कर दिया है। यह यात्रा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत केंद्र की विवादास्पद तीन-भाषा नीति और आगामी परिसीमन प्रक्रिया में दक्षिणी राज्यों के लिए संसदीय सीटों में संभावित कमी को लेकर बढ़ते तनाव के साथ मेल खाती है। कांग्रेस सहित राजनीतिक समूह सड़कों पर उतर आए हैं, और स्टालिन ने रणनीति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिससे क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय नीति के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है।

अमित शाह की यात्रा: विरोध का केंद्र बिंदु

अमित शाह 26 फरवरी 2025 को तमिलनाडु पहुंचे, जहां माहौल पहले से ही गरमाया हुआ था। उनकी यात्रा में कोयंबटूर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए कार्यालय परिसर का उद्घाटन और ईशा योग फाउंडेशन में महा शिवरात्रि समारोह में भाग लेना शामिल है। हालांकि, उनके आगमन का कई राजनीतिक गुटों ने कड़ा विरोध किया है। 25 फरवरी को, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के अध्यक्ष सेल्वापेरुन्थगई के नेतृत्व में कोयंबटूर में एक विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें शाह और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तमिलनाडु के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लहराए, काले गुब्बारे छोड़े और शाह की निंदा करने वाले तख्तियां प्रदर्शित कीं, जिसमें शिक्षा निधि रोकने, आपदा राहत में देरी और विवादास्पद भाषा नीति के खिलाफ नाराजगी झलकी।

सेल्वापेरुन्थगई ने केंद्र को चेतावनी दी कि वह “लोगों को भड़काने” या “दंगे पैदा करने” से बचे, यह दावा करते हुए कि तमिलनाडु की चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। “लोग नफरत से ऊपर उठेंगे,” उन्होंने कहा, राज्य के एकता और थोपे गए नीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक प्रतिरोध पर जोर दिया। इससे पहले, 18 फरवरी को, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और द्रविड़र कड़गम सहित कई दलों और संगठनों ने शाह के खिलाफ काले झंडे के प्रदर्शन की योजना बनाई थी, जिसमें भाषा नीति के साथ-साथ संसद में बी.आर. अंबेडकर पर उनकी कथित टिप्पणियों को भी विरोध का आधार बताया गया था।

ये प्रदर्शन तमिलनाडु में भाजपा की कमजोर स्थिति और केंद्र के प्रति व्यापक अविश्वास को उजागर करते हैं। हाल ही में भाजपा नेता रंजा नायर के भाषा थोपने के मुद्दे पर इस्तीफे ने पार्टी की स्थिति को और कमजोर किया है, जिससे शाह की यात्रा समर्थकों और विरोधियों दोनों के लिए एक प्रतीकात्मक युद्धक्षेत्र बन गई है।

एमके स्टालिन की सर्वदलीय बैठक: एकजुटता की पुकार

इन घटनाक्रमों के बीच, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 5 मार्च 2025 को एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर निर्णायक कदम उठाया है, ताकि परिसीमन के खतरे और भाषा नीति विवाद का जवाब दिया जा सके। जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों के पुनर्आवंटन की परिसीमन प्रक्रिया ने तमिलनाडु में चिंता पैदा की है, जहां स्टालिन ने चेतावनी दी है कि राज्य अपने आठ सांसदों को खो सकता है। उनका तर्क है कि यह तमिलनाडु को अपनी सफल जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के लिए दंडित करता है, जो दशकों पहले भोजन की कमी और गरीबी से निपटने के लिए अपनाई गई थी।

“तमिलनाडु राष्ट्र के प्रति समर्पित राज्य है,” स्टालिन ने टीएनसीसी के प्रदर्शन के भाव को दोहराते हुए कहा। “हमने परिवार नियोजन को पूरी निष्ठा से अपनाया, और अब हमें इसके लिए सजा दी जा रही है।” यह बैठक भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने का प्रयास है, जिसे स्टालिन “अन्यायपूर्ण” कदम के खिलाफ सामूहिक रुख मानते हैं। यह कदम उनकी हालिया केंद्रीय बजट 2025 की आलोचना के बाद आया है, जिसमें उन्होंने केंद्र पर उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्यों को तरजीह देने और तमिलनाडु के आर्थिक योगदान को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था।

परिसीमन का मुद्दा भाषा नीति विवाद के साथ जुड़ गया है, जिससे तमिलनाडु की स्वायत्तता और पहचान के क्षरण की आशंका बढ़ गई है। स्टालिन की रणनीति दोहरी प्रतीत होती है: केंद्र पर दबाव बनाने के लिए क्षेत्रीय समर्थन जुटाना और 2026 के राज्य चुनावों से पहले डीएमके के नैरेटिव को मजबूत करना।

amit shah with stalin

तीन-भाषा नीति: एक पुराना घाव

प्रदर्शनों का मूल केंद्र की तीन-भाषा नीति पर जोर है, जो एनईपी के तहत छात्रों को अपनी मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी (या दूसरी भारतीय भाषा) सीखने का आदेश देती है। तमिलनाडु, जो 1968 से अपनी दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) का पालन करता आ रहा है, ने इस ढांचे का 2020 में एनईपी के साथ फिर से कड़ा विरोध किया है। डीएमके, अपने सहयोगियों जैसे एमडीएमके और विपक्षी दलों जैसे एआईएडीएमके और तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के साथ, इसे हिंदी थोपने और तमिल संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश मानता है।

तनाव तब और बढ़ गया जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु को 2,150 करोड़ रुपये से अधिक की समग्र शिक्षा निधि की रिलीज को एनईपी स्वीकार करने से जोड़ा। स्टालिन ने इसे “ब्लैकमेल” करार दिया, इसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि वह 10,000 करोड़ रुपये की पेशकश पर भी नहीं झुकेंगे। उनके बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने “भाषा युद्ध” की चेतावनी दी, यह तर्क देते हुए कि हिंदी स्वीकार करने वाले राज्य अपनी मातृभाषा खोने का जोखिम उठाते हैं। “शिक्षा तमिलों का अधिकार है,” उदयनिधि ने 18 फरवरी को डीएमके यूथ विंग के विरोध के दौरान कहा।

केंद्र के आलोचक तर्क देते हैं कि यह नीति तमिलनाडु की भाषाई विरासत और शैक्षिक संप्रभुता को नजरअंदाज करती है, एक रुख जिसे विद्वानों और कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन दिया है। इसके विपरीत, भाजपा नेता के. अन्नामलाई एनईपी का बचाव करते हैं, इसे समानता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने वाला बताते हैं। हालांकि, अन्नामलाई की आवाज राज्य के एकजुट विरोध के सामने दब गई है, जिसमें गैर-डीएमके दल भी “राजनीतिक दबाव” के खिलाफ शामिल हो गए हैं।

एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण: सुर्खियों से परे

हालांकि स्थापित नैरेटिव इसे केंद्र-राज्य टकराव के रूप में चित्रित करता है, गहराई में देखने पर जटिलताओं की परतें दिखती हैं। तीन-भाषा नीति, जिसे समावेशी बताया जाता है, भारत की भाषाई विविधता और गैर-हिंदी भाषी राज्यों के ऐतिहासिक प्रतिरोध को ध्यान में नहीं रखती। तमिलनाडु का विरोध महज हठ नहीं है—यह तमिल पहचान को उत्तरी प्रभुत्व के खिलाफ संरक्षित करने की दशकों पुरानी लड़ाई में निहित है। केंद्र का निधि रोकने का तरीका, हालांकि कानूनी रूप से उसके अधिकार क्षेत्र में है, नैतिक सवाल उठाता है कि क्या संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने वाले राज्यों को दंडित करना उचित है।

दूसरी ओर, डीएमके का बयानबाजी—एनईपी को “2000 साल का प्रतिगमन” कहना—राजनीतिक लाभ के लिए अतिशयोक्ति हो सकती है। स्टालिन की सर्वदलीय बैठक और विरोध प्रदर्शन 2026 को ध्यान में रखते हुए भाजपा को तमिलनाडु के लिए खतरे के रूप में चित्रित करने और सत्ता मजबूत करने की रणनीतिक चाल हो सकती हैं। परिसीमन का बहस भी स्पष्ट नहीं है: जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व एक लोकतांत्रिक सिद्धांत है, फिर भी यह उन राज्यों को नुकसान पहुंचाता है जिन्होंने अनियंत्रित वृद्धि के बजाय विकास को प्राथमिकता दी।

आगे क्या?

जब अमित शाह इस शत्रुतापूर्ण माहौल में अपनी यात्रा कर रहे हैं, तो यह यात्रा या तो विभाजन को गहरा सकती है या बातचीत को मजबूर कर सकती है—हालांकि बाद वाला संभावना कम दिखता है, क्योंकि भाजपा अपने रुख पर अडिग है। स्टालिन की सर्वदलीय बैठक तमिलनाडु के राजनीतिक वर्ग की एकता की परीक्षा लेगी, जो संभवतः केंद्रीय नीतियों के खिलाफ व्यापक दक्षिणी प्रतिरोध को आकार दे सकती है। इस बीच, विरोध प्रदर्शन एक ऐसी जनता का संकेत देते हैं जो पहचान और स्वायत्तता के मामलों में झुकने को तैयार नहीं है।

अभी के लिए, तमिलनाडु एक चौराहे पर खड़ा है। क्या यह दबाव में झुक जाएगा, या केंद्र को अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा? एक बात स्पष्ट है: यह सिर्फ भाषा या सीटों के बारे में नहीं है—यह एक राज्य की आत्मा को परिभाषित करने के अधिकार का सवाल है। जैसे-जैसे यह नाटक सामने आता है, राष्ट्र देख रहा है, और तमिलनाडु का जवाब उसकी सीमाओं से कहीं आगे तक गूंज सकता है।

Ye Bhi Pade – पीएम किसान योजना: 20वीं किस्त का इंतजार खत्म? अभी देखें!

ATM Cutting Gang Arrest: तेलंगाना में वारदात के बाद ग्वालियर में दबोचे गए 3 शातिर बदमाश

ATM Cutting Gang Arrest: ग्वालियर पुलिस ने तेलंगाना में एटीएम काटकर फरार

Stocks to Buy Today: Finolex Cables और Adani Gas समेत इन शेयरों में तेजी के संकेत

Stocks to Buy Today: साल 2026 के पहले कारोबारी सत्र में घरेलू

HR Top 10 News Today: जानें आज की मुख्य खबरें (02-01-2026)

HR Top 10 News Today: 1. हरियाणा में कड़ाके की ठंड का

CG Top 10 News Today: धान तस्करी से लेकर भोरमदेव कॉरिडोर तक (02-01-2026)

CG Top 10 News Today: 1. अंतरराज्यीय धान तस्करी गिरोह का पर्दाफाश

MP Top 10 News Today: मध्यप्रदेश की 10 बड़ी खबरें (02-01-2026)

MP Top 10 News Today: 1. भोपाल दौरे पर संघ प्रमुख मोहन

Daily Horoscope 2026: मेष से मीन तक, जानिए आज का दैनिक राशिफल (02-01-2025)

Daily Horoscope 2026: मेष राशि आज का राशिफल आज साल का दूसरा

Sandipani Vidyalaya: सीएम डॉ. यादव खाचरौद में 74.35 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की देंगे सौगात

Sandipani Vidyalaya: सांदीपनि विद्यालय का होगा लोकार्पण Sandipani Vidyalaya: मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन

CM Mohan Yadav: मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नये साल में छोटे दुकानदारों को सौगात

CM Mohan Yadav: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा निर्देशों के अनुसार

CM Mohan Yadav: माँ नर्मदा की कृपा से प्रदेश लगातार हो रहा है समृद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

CM Mohan Yadav: मुख्यमंत्री ने खंडवा में राजराजेश्वरी मंदिर में की पूजा

Kasganj: रैन बसेरा बना रसोईघर! गरीबों के आशियाने से उठा धुआं

Report- Wasim Qureshi Kasganj: रैन बसेरा बना रसोईघर! गरीबों के आशियाने से

Unnao: 48 घंटे में हत्याकांड का खुलासा

Report- Anmol Kumar Unnao: जिले में पुलिस ने महज 48 घंटे के

Hapur: हापुड़ में यातायात माह का शुभारंभ

Hapur: 1 जनवरी से जिले में यातायात माह का विधिवत शुभारंभ हो

Lakhimpur Khiri: लखीमपुर खीरी में जंगली जानवर का हमला

Report- Vikas Gupta Lakhimpur Khiri: जिले के धौरहरा कोतवाली क्षेत्र में साल

Switzerland Resort Blast: नए साल पर जश्न के दौरान रिसॉर्ट में धमाका, कई लोगों की मौत, वजह अज्ञात

By: Priyanshi Soni Switzerland Resort blast: स्विट्जरलैंड के मशहूर अल्पाइन स्की रिसॉर्ट

Ikkis Review: युद्ध के मैदान की वीरता, पिता की चुप्पी और धर्मेंद्र की संवेदनाओं की कहानी

स्टार रेटिंग: 3.5/5निर्देशक: श्रीराम राघवनशैली: वॉर ड्रामाकलाकार: धर्मेंद्र, अगस्त्य नंदा, जयदीप अहलावत,

2026 Assembly Elections: भारत की राजनीति के लिए क्यों अहम है यह साल?

2026 Assembly Elections: भारत की सियासत में 2026 Assembly Elections बेहद अहम