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बस्तर के जंगल में ड्रोन: क्या माओवादी अब हवा से करेंगे हमला?

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बस्तर के जंगल में ड्रोन: क्या माओवादी अब हवा से करेंगे हमला?

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में पहली बार एक ड्रोन की बरामदगी ने पुलिस को चौंका दिया है। यह ड्रोन घने जंगलों में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र से प्राप्त हुआ है। पुलिस का मानना है कि माओवादी इस उड़ने वाले उपकरण का उपयोग सुरक्षा बलों के शिविरों और उनकी गतिविधियों की निगरानी के लिए कर रहे थे।

बस्तर के जंगल में ड्रोन: क्या माओवादी अब हवा से करेंगे हमला?

बरामदगी की जानकारी

स्थान: सुकमा जिला, गुंडराजगुडेम जंगल
तारीख: रविवार, 23 फरवरी 2025
विवरण:

  • पुलिस को माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी।
  • टीम ने इलाके में छानबीन की, लेकिन माओवादी नहीं मिले।
  • उनके छोड़े गए सामानों के ढेर (डंप) में ड्रोन सहित अन्य वस्तुएं मिलीं।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) पी. सुंदरराज ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा,

“हथियार, गोला-बारूद और दैनिक उपयोग की वस्तुएं तो पहले भी मिली हैं, लेकिन ड्रोन की बरामदगी पहली बार हुई है। यह हमारे उस संदेह को पक्का करता है कि माओवादी ड्रोन से सुरक्षा बलों की गतिविधियों की तस्वीरें लेने की कोशिश कर रहे थे।”


ड्रोन की विशेषताएं

विशेषताविवरण
उपयोगफोटोग्राफी और वीडियोग्राफी
रेंज3 किलोमीटर का दायरा
पेलोड क्षमताकोई पेलोड नहीं
प्रकारशादी-समारोहों में प्रयोग होने वाला

IG सुंदरराज के अनुसार:

  • यह ड्रोन प्रतिबंधित वस्तु नहीं है और आसानी से खरीदा जा सकता है।
  • जंगल में नेटवर्क की समस्या और इसके आकार के कारण इसे आसानी से देखा जा सकता है।
  • सुरक्षा बलों के पास इसका जवाब तैयार है।

सुरक्षा बलों की रणनीति

हाल के दिनों में माओवादियों के खिलाफ अभियान तेज हुए हैं।

  • पिछले एक साल में उपलब्धि: बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद 300 से अधिक माओवादी मारे गए।
  • तकनीक का उपयोग: लंबी दूरी के ड्रोन ने सटीक हमलों में मदद की।

IG ने कहा,

“यह संवेदनशील मुद्दा है, लेकिन चिंताजनक नहीं। माओवादियों के पास ड्रोन हो सकता है, लेकिन इसे चलाना आसान नहीं। हम सतर्क हैं और उनकी हर हरकत पर नजर रखे हुए हैं।”


निष्कर्ष

यह घटना माओवादियों की बदलती रणनीति को दर्शाती है। सस्ते और आसानी से उपलब्ध ड्रोन का उपयोग उनके लिए नया हथियार बन सकता है। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा बल पहले से ही इससे निपटने के लिए तैयार हैं। यह खोज न केवल तकनीक के दुरुपयोग को उजागर करती है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर देती है।

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