BY: Yoganand Shrivastva
Gwalior News, एक तरफ जहां पूरा देश आधुनिकता और विज्ञान की ओर बढ़ रहा है, वहीं ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर में अंधविश्वास और ठगी का एक ऐसा काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जो सीधे तौर पर आम जनता की गाढ़ी कमाई लूट रहा है। शहर में खुद को ‘गुरु सुल्तान जी सम्राट’ और ‘ऑल इंडिया मास्टर किंग (सभी गुरुओं का महागुरु)’ बताने वाला एक कथित तांत्रिक इन दिनों भोले-भाले लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहा है। हैरानी की बात यह है कि कानून की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन खाकी की चुप्पी और कथित पत्रकारों की सरपरस्ती के कारण यह अवैध धंधा शहर में सुरक्षित रूप से फल-फूल रहा है।
ठगी के वही पुराने और लुभावने हथकंडे
Gwalior News, शहर में जगह-जगह पर्चे चिपकाकर और खुलेआम विज्ञापन देकर ये ठग लोगों की भावनाओं और मजबूरियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। इनके विज्ञापनों में आमतौर पर निम्नलिखित लुभावने दावे किए जाते हैं:

- मनचाही शादी और प्रेम प्रसंग: प्यार में धोखा खाने वालों को वापस मिलाने का झांसा।
- पारिवारिक कलह: सास-बहु में झगड़ा और घरेलू अशांति दूर करने का दावा।
- कानूनी उलझनें: कोर्ट-कचहरी के मामलों और मुकदमों से तुरंत राहत दिलाने का प्रलोभन।
- बीमारियों का चमत्कारी इलाज: दवाइयों से ठीक न होने वाली गंभीर बीमारियों को तंत्र-मंत्र से चुटकियों में ठीक करने का दावा।
इन झूठे दावों के जाल में फंसकर जब बेबस लोग इनके पास पहुंचते हैं, तो उनसे तंत्र-मंत्र और पूजा-पाठ के नाम पर मोटा पैसा (लाखों रुपये) ऐंठ लिया जाता है। काम न होने पर जब पीड़ित ठगी का अहसास कर विरोध करते हैं, तो उन्हें डरा-धमका कर चुप करा दिया जाता है।
BNS की धारा 318 का खुला उल्लंघन, पर कानून अंधा!
Gwalior News, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी व्यक्ति को झूठे वादे, छल या धोखाधड़ी के जरिए संपत्ति या पैसे से वंचित करना गंभीर अपराध है, जिसमें 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद ग्वालियर में खुलेआम इस कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि जब जुर्म सबके सामने है, तो प्रशासन इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
खाकी और कलम की मिलीभगत: संरक्षण में चल रहा रैकेट
Gwalior News, सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, वह बेहद चौंकाने वाली है। इस तरह के कुकुरमुत्ते की तरह उग आए ठगों के पास न तो कोई कानूनी वैधता है और न ही कोई अधिकार, फिर भी इनका धंधा बेखौफ चल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्थानीय पुलिस के एक बड़े हिस्से और कुछ कथित भ्रष्ट पत्रकारों की संलिप्तता (मिलीभगत) बताई जा रही है।
- रिश्वत का खेल: इन कथित ‘गुरुओं’ और ठगों द्वारा आम जनता से लूटे गए काले धन का एक बड़ा हिस्सा संरक्षण देने वाले सुरक्षाकर्मियों और बिचौलिये पत्रकारों की जेब तक पहुंचता है।
- खबर दबाने का तंत्र: जब भी कोई पीड़ित या जागरूक नागरिक इनके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, तो ये तथाकथित पत्रकार अपनी पहुंच और रसूख का इस्तेमाल कर मामले को दबा देते हैं या पुलिस की आड़ में पीड़ित को ही डरा देते हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
Gwalior News, क्या ग्वालियर पुलिस प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस बात से पूरी तरह अनजान हैं कि शहर के बीचों-बीच विज्ञापनों के जरिए इस तरह का अंधविश्वास और ठगी का बाजार सजा हुआ है? जब अखबारों और दीवारों पर इनके खुलेआम नंबर और दावे छप रहे हैं, तो पुलिस की खुफिया एजेंसी (Intelligence) और साइबर सेल क्या कर रही है?
यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि मिलीभगत की इस गहरी परत के कारण अपराधी पूरी तरह बेखौफ हैं और आम जनता पिस रही है। यदि समय रहते इन तथाकथित ‘गुरु सुल्तान जी’ और उनके जैसे अन्य ठगों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह शहर अंधविश्वास और अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह बनकर रह जाएगा।


