Aaj ka Panchang: 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। यह तिथि रात करीब 9:37 बजे तक रहने के बाद अमावस्या तिथि शुरू होगी। शुक्रवार का दिन होने के कारण धार्मिक दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण है। पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर दिन के शुभ और अशुभ समय का आकलन किया जाता है।
उत्तराफाल्गुनी के बाद लगेगा हस्त नक्षत्र
दिन की शुरुआत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के साथ होगी। यह नक्षत्र रात करीब 9:20 बजे तक रहने के बाद हस्त नक्षत्र शुरू हो जाएगा। चंद्रमा की स्थिति भी दिन के दौरान राशि परिवर्तन करेगी। पंचांग के अनुसार चंद्रमा सुबह के शुरुआती समय में सिंह राशि में रहने के बाद कन्या राशि में प्रवेश करेगा।
ब्रह्म मुहूर्त से लेकर शुभ मुहूर्त तक जानें समय
9 अक्टूबर को दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होगी। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह करीब 4:57 बजे से 5:45 बजे तक रहेगा। वहीं दिन में शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर करीब 12:03 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। इन समयों का उपयोग पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यों और शुभ गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
राहुकाल में शुभ काम शुरू करने से बचें
शुक्रवार 9 अक्टूबर को राहुकाल सुबह करीब 10:58 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह करीब 8:01 बजे से 9:30 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 3:24 बजे से शाम 4:52 बजे तक रहने की गणना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
शुक्रवार को रहेगा पश्चिम दिशा का दिशाशूल
9 अक्टूबर को दिशाशूल पश्चिम दिशा में माना गया है। धार्मिक पंचांग परंपरा के अनुसार जिस दिशा में दिशाशूल हो, उस ओर यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी यात्रा की योजना बनाते समय मौसम, सड़क की स्थिति और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
सूर्य कन्या राशि में, चंद्रमा भी बदलेगा राशि
पंचांग के अनुसार 9 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा दिन के शुरुआती हिस्से में सिंह राशि में रहने के बाद कन्या राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य और चंद्रमा की यह स्थिति तिथि, नक्षत्र और योग के साथ मिलकर दिन के ज्योतिषीय पंचांग का हिस्सा बनती है।
दिन में ये अशुभ समय भी रहेंगे
9 अक्टूबर को सुबह और दोपहर के बीच अलग-अलग अशुभ काल रहेंगे। राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल को सामान्य तौर पर नए और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। ऐसे में किसी नए काम की शुरुआत करने से पहले शुभ मुहूर्त और स्थानीय पंचांग के समय को देखना उपयोगी रहेगा।
चतुर्दशी श्राद्ध के लिए भी महत्वपूर्ण है दिन
9 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि होने के कारण पितृ पक्ष से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में भी इस दिन का महत्व है। पंचांग गणना के अनुसार इस दिन चतुर्दशी श्राद्ध मनाया जाएगा। श्राद्ध और धार्मिक कर्मकांड के लिए स्थानीय परंपरा तथा परिवार की मान्यताओं के अनुसार विधि और समय का पालन किया जाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
9 अक्टूबर को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। एक पंचांग गणना के अनुसार सूर्योदय करीब 6:33 बजे और सूर्यास्त करीब 6:21 बजे बताया गया है। वहीं अलग शहरों के पंचांग में इन समयों में अंतर देखने को मिल सकता है, इसलिए धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय शहर के अनुसार पंचांग देखना अधिक उचित माना जाता है।
9 अक्टूबर का पंचांग एक नजर में
9 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार रहेगा और कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात तक रहेगी। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के बाद हस्त नक्षत्र का आरंभ होगा। दिन में ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त जैसे शुभ समय रहेंगे, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। चतुर्दशी श्राद्ध के कारण भी यह दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा।
शहर के अनुसार बदल सकता है पंचांग का समय
पंचांग की गणना सूर्योदय, सूर्यास्त और खगोलीय स्थितियों पर आधारित होती है। यही कारण है कि एक ही दिन के शुभ मुहूर्त, राहुकाल, तिथि समाप्ति और अन्य समय अलग-अलग शहरों में कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए पूजा, व्रत, श्राद्ध या किसी शुभ कार्य के लिए अपने शहर के अनुसार पंचांग का समय देखना बेहतर रहेगा।


