IMEC Corridor: भारत और यूरोप को मध्य पूर्व के रास्ते जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना India-Middle East-Europe Economic Corridor यानी IMEC एक बार फिर चर्चा में है। सितंबर 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान इस परियोजना की घोषणा की गई थी। इसके तहत भारत को अरब खाड़ी और फिर यूरोप से जोड़ने के लिए समुद्री मार्ग, रेल नेटवर्क और दूसरी कनेक्टिविटी सुविधाओं को विकसित करने की योजना है। आधिकारिक समझौते के मुताबिक, कॉरिडोर में भारत से अरब खाड़ी तक पूर्वी हिस्सा और खाड़ी से यूरोप तक उत्तरी हिस्सा शामिल है।
इस परियोजना को लेकर शुरुआत से ही वैश्विक स्तर पर काफी रुचि रही है। इसे एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच व्यापार तथा सप्लाई चेन को बेहतर बनाने वाली कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में देखा गया है। हालांकि, इजरायल-हमास युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण इसके क्रियान्वयन को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आई हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी 2023 में माना था कि क्षेत्रीय परिस्थितियों ने IMEC के सामने मुश्किलें पैदा की हैं, लेकिन परियोजना के पीछे का आर्थिक तर्क कायम है।
IMEC Corridor: ट्रंप ने फिर क्यों दिया प्रोजेक्ट को समर्थन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2026 में खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बैठक के दौरान क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे और वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत पर जोर दिया। व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान Gulf Cooperation Council के नेताओं के साथ बैठक की थी।
ट्रंप प्रशासन की ऊर्जा नीति में सप्लाई चेन को अधिक विविध और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे माहौल में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर का मुद्दा फिर सामने आया है। IMEC की मूल योजना भी एशिया, अरब खाड़ी और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने तथा व्यापारिक सप्लाई चेन को मजबूत करने पर केंद्रित है।
IMEC Corridor: ईरान के साथ तनाव ने उजागर की रूट की कमजोरी
IMEC की प्रस्तावित संरचना में भारत से आने वाला माल समुद्र के रास्ते UAE के बंदरगाहों तक पहुंचता है। इसके बाद रेल और दूसरे जमीनी नेटवर्क के जरिए इसे सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल होते हुए यूरोप तक ले जाने की योजना है। आधिकारिक समझौते में UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजरायल और यूरोप के बीच रेल तथा समुद्री कनेक्टिविटी का उल्लेख किया गया है।
यहीं पर मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां परियोजना के लिए चुनौती बनती हैं। फारस की खाड़ी से जुड़े प्रमुख बंदरगाहों तक पहुंचने वाले समुद्री मार्ग क्षेत्रीय तनाव से प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा पश्चिमी हिस्से में इजरायल से जुड़ा मार्ग भी मध्य पूर्व के संघर्ष की परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है।
IMEC Corridor: होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम
IMEC के समुद्री हिस्से को समझने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व बेहद बड़ा है। फारस की खाड़ी से बाहर आने-जाने वाले समुद्री व्यापार के लिए यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है। UAE के प्रमुख बंदरगाह खाड़ी क्षेत्र में स्थित हैं, इसलिए भारत से समुद्र के रास्ते वहां पहुंचने वाले माल की कनेक्टिविटी क्षेत्रीय समुद्री परिस्थितियों से जुड़ी रहती है।
हालांकि, मौजूदा स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने अगस्त 2026 में कहा था कि अमेरिकी सेनाएं होर्मुज क्षेत्र में शिपिंग की सुरक्षा कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात जारी है। ऐसे में इस मार्ग की स्थिति को लेकर खबरों में किए जा रहे दावों को अलग-अलग स्रोतों के संदर्भ में देखना जरूरी है।
IMEC Corridor: क्या एक ही रास्ते पर निर्भर रहना होगा भारी
विशेषज्ञों के बीच एक प्रमुख सवाल यह है कि क्या IMEC को केवल एक तय रूट के तौर पर विकसित करना पर्याप्त होगा। मध्य पूर्व में लगातार बदलती सुरक्षा परिस्थितियां यह दिखाती हैं कि किसी एक समुद्री या जमीनी मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता सप्लाई चेन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
इसी वजह से IMEC को भविष्य में एकल कॉरिडोर के बजाय कई जुड़े हुए मार्गों के नेटवर्क के रूप में विकसित करने की चर्चा होती रही है। इससे किसी एक हिस्से में रुकावट आने पर माल को दूसरे रास्ते से आगे ले जाने की गुंजाइश बढ़ सकती है।
IMEC Corridor: ओमान और फुजैराह जैसे विकल्पों पर भी चर्चा
वैकल्पिक कनेक्टिविटी को लेकर ओमान के सलालाह जैसे बंदरगाहों को संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है। इसी तरह UAE के पूर्वी तट पर स्थित फुजैराह भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे ओमान की खाड़ी की ओर खुलता है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे अन्य खाड़ी बंदरगाहों से अलग बनाती है।
हालांकि, केवल नया बंदरगाह जोड़ देने से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। किसी वैकल्पिक नेटवर्क को सफल बनाने के लिए रेल कनेक्टिविटी, सड़क, ऊर्जा परिवहन, पाइपलाइन और डिजिटल नेटवर्क जैसी कई व्यवस्थाओं को साथ विकसित करना होगा।
IMEC Corridor: सिर्फ कार्गो नहीं, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क भी योजना का हिस्सा
IMEC की मूल योजना केवल सामान की आवाजाही तक सीमित नहीं है। भारत और अन्य भागीदार देशों के आधिकारिक समझौते में प्रस्तावित रेल मार्ग के साथ बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए केबल तथा स्वच्छ हाइड्रोजन के निर्यात के लिए पाइपलाइन बिछाने की संभावना भी शामिल है।
इसका मतलब है कि भविष्य में IMEC को केवल एक ट्रेड रूट के तौर पर नहीं, बल्कि परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े व्यापक नेटवर्क के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। ऐसे में किसी एक मार्ग में आने वाला व्यवधान पूरे नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है, लेकिन वैकल्पिक कनेक्शन विकसित होने पर जोखिम को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है।
IMEC Corridor: चीन के BRI के बीच क्यों अहम है यह परियोजना
IMEC को वैश्विक स्तर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह भारत, अरब खाड़ी और यूरोप के बीच एक नया आर्थिक कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश है। इसके आधिकारिक दस्तावेज में भी व्यापार को आसान बनाने, सप्लाई चेन मजबूत करने, परिवहन लागत घटाने और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण बढ़ाने जैसे उद्देश्य बताए गए हैं।
हालांकि, इसे चीन के Belt and Road Initiative का सीधा विकल्प मानना एक विश्लेषणात्मक व्याख्या है। IMEC का अपना घोषित उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी तथा आर्थिक एकीकरण को बढ़ाना है। इसकी वास्तविक क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके सदस्य देश बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और वैकल्पिक मार्गों से जुड़ी चुनौतियों को किस तरह दूर करते हैं।
IMEC Corridor: आगे की राह में सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
IMEC की योजना 2023 में सामने आई थी और इसके बाद मध्य पूर्व की परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी उस समय माना था कि क्षेत्रीय संघर्ष परियोजना के क्रियान्वयन के लिए चुनौती पैदा कर सकता है, लेकिन कॉरिडोर के पीछे का आर्थिक आधार बना हुआ है।
अब अमेरिकी समर्थन और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ते जोर के बीच IMEC फिर वैश्विक चर्चा में है। लेकिन परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए केवल राजनीतिक समर्थन पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षित समुद्री मार्ग, वैकल्पिक गेटवे, रेल नेटवर्क, ऊर्जा कनेक्टिविटी और मध्य पूर्व की स्थिरता जैसे मुद्दे इसकी आगे की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


