Waiting Hai Review की बात करें तो यह सीरीज भारतीय रेलवे में तत्काल टिकट बुक करने की रोजमर्रा की परेशानी को एक क्राइम ड्रामा की कहानी में बदलने की कोशिश करती है। सीरीज की कहानी पटना की पृष्ठभूमि में रखी गई है, जहां एक नए RPF कांस्टेबल को तत्काल टिकट बुकिंग में कुछ ऐसा पैटर्न नजर आता है, जो उसे एक बड़े टिकट रैकेट तक पहुंचाता है। सात एपिसोड की यह सीरीज 16 सितंबर 2026 से Prime Video और MX Player पर स्ट्रीम हो रही है।
Waiting Hai Review के मुताबिक इसका आइडिया काफी जाना-पहचाना है, क्योंकि तत्काल टिकट के लिए कुछ ही सेकंड में कन्फर्म सीट हासिल करने की जद्दोजहद से बड़ी संख्या में भारतीय यात्री परिचित हैं। इसी समस्या को टेक्नोलॉजी, लालच, पुलिस जांच और अवैध टिकटिंग नेटवर्क से जोड़कर कहानी तैयार की गई है।
Waiting Hai Review: तत्काल टिकट से शुरू होता है बड़ा खेल
Waiting Hai Review में दिव्येंदु शर्मा ने सुगम मिश्रा नाम के नए RPF कांस्टेबल की भूमिका निभाई है। सुगम नौकरी में नया है और अपने काम के साथ निजी जिंदगी की जिम्मेदारियों को भी संभाल रहा है। ड्यूटी के दौरान उसे दिखाई देता है कि आम यात्री तत्काल टिकट हासिल करने के लिए परेशान हैं, जबकि कुछ एजेंट आसानी से टिकट हासिल कर लेते हैं।
Waiting Hai Review में यही सवाल सुगम की जांच की शुरुआत बनता है। वह इस असामान्य पैटर्न को समझने की कोशिश करता है और धीरे-धीरे ऐसे नेटवर्क तक पहुंचता है, जहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तत्काल टिकट बुकिंग को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
Waiting Hai Review: दिव्येंदु और भुवन अरोड़ा की कहानी आमने-सामने
Waiting Hai Review में कहानी का दूसरा महत्वपूर्ण किरदार अफरोज हम्सा है, जिसे भुवन अरोड़ा ने निभाया है। अफरोज एक टेक्निकल रूप से कुशल कंप्यूटर स्टूडेंट है। शुरुआत में उसकी तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल एक छोटी जरूरत को पूरा करने के लिए होता है, लेकिन धीरे-धीरे यही क्षमता उसके लिए कमाई का जरिया बन जाती है।
Waiting Hai Review में अफरोज के किरदार को सीधे अपराधी के रूप में पेश करने के बजाय उसके बदलाव को धीरे-धीरे दिखाया गया है। उसके चाचा मामा का किरदार निभाने वाले विजय मौर्य उसे टिकटिंग के इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रभावित करते हैं। इसके बाद छोटा-सा प्रयोग बड़े अवैध नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है।
Waiting Hai Review: पुलिस बनाम अपराधी से आगे जाती है कहानी
Waiting Hai Review की एक खास बात यह है कि सीरीज केवल पुलिस और अपराधियों के बीच पीछा करने वाली कहानी नहीं बनती। सुगम और अफरोज दोनों अलग-अलग रास्तों से आगे बढ़ते हैं, लेकिन दोनों की परिस्थितियां कहानी को एक-दूसरे के करीब लाती हैं।
Waiting Hai Review में सुगम सिस्टम के भीतर रहकर अपना काम सही तरीके से करने की कोशिश करता है, जबकि अफरोज अपनी तकनीकी प्रतिभा को पैसे कमाने के लिए इस्तेमाल करने लगता है। इस समानांतर कहानी से दोनों मुख्य किरदारों को कुछ भावनात्मक गहराई मिलती है।
Waiting Hai Review: एक्टिंग बनी सीरीज की मजबूत कड़ी
Waiting Hai Review में भुवन अरोड़ा का अफरोज वाला किरदार खास तौर पर ध्यान खींचता है। एक सामान्य और थोड़ा झिझकने वाले युवक से लेकर टिकट रैकेट में आत्मविश्वास से काम करने वाले व्यक्ति तक का उसका सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ता है।
Waiting Hai Review में दिव्येंदु शर्मा भी सुगम मिश्रा के किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। उनका किरदार ऐसा पुलिसकर्मी है जिसके पास हर सवाल का तुरंत जवाब नहीं है। नौकरी, अधिकारियों का दबाव और शादीशुदा जिंदगी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश सुगम को बाकी पारंपरिक पुलिस किरदारों से थोड़ा अलग बनाती है। हर्षिता गौर, कुमुद मिश्रा, विजय मौर्य और सुनीता राजवार जैसे कलाकार भी कहानी को सपोर्ट करते हैं।
Waiting Hai Review: मजबूत आइडिया लेकिन राइटिंग में कमी
Waiting Hai Review में सबसे बड़ी परेशानी इसकी राइटिंग और टोन को लेकर सामने आती है। मूल टिकट रैकेट की कहानी अपने आप में इतनी दिलचस्प है कि दर्शक इसे आगे जानना चाहता है, लेकिन बीच-बीच में आने वाले कुछ ट्रैक मुख्य कहानी से अलग महसूस होते हैं।
Waiting Hai Review में गंभीर भावनात्मक दृश्यों के बीच अचानक हल्की या बचकानी कॉमेडी आने से कई जगह कहानी की गति प्रभावित होती है। हालांकि दूसरे हिस्से में सुगम की जांच आगे बढ़ने के साथ सीरीज ज्यादा दिलचस्प होने लगती है और अफरोज के बदलाव से कहानी में तनाव भी बढ़ता है। Eastern Eye ने भी असमान लेखन और टोनल बदलावों को सीरीज की प्रमुख कमजोरियों में गिना है।
Waiting Hai Review: देखें या नहीं?
Waiting Hai Review के आधार पर कहा जा सकता है कि सीरीज का सबसे बड़ा आकर्षण उसका विषय है। तत्काल टिकट की रोजमर्रा की परेशानी को टेक्नोलॉजी और क्राइम की कहानी से जोड़ना एक अलग तरह का आइडिया है। दिव्येंदु शर्मा और भुवन अरोड़ा की परफॉर्मेंस कहानी को संभालती है और इसमें कॉमेडी, इमोशन और सस्पेंस के हिस्से भी देखने को मिलते हैं।
Waiting Hai Review में कमी यह है कि कहानी हर जगह एक जैसी गति और टोन बनाए नहीं रख पाती। टाइम्स ऑफ इंडिया की समीक्षा ने भी इसे ऐसे शो के तौर पर देखा है जिसमें मजबूत आइडिया और अच्छे प्रदर्शन के बावजूद लेखन इसे अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचने देता।
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