Chanakya Niti : आंखों और नजरों के इशारों पर दें ध्यान
Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य की नीतियों में व्यक्ति के व्यवहार और उसके स्वभाव को समझने के कई तरीके बताए गए हैं। जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब सामने वाला व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ, यह समझना मुश्किल हो जाता है। खासकर तब, जब व्यक्ति अपनी बात को इस तरह से पेश करे कि उस पर आसानी से विश्वास हो जाए।चाणक्य नीति से जुड़े विचारों के अनुसार, किसी व्यक्ति की बात को समझने के लिए केवल उसके शब्दों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उसके व्यवहार, बातचीत के तरीके और हाव-भाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। इन्हीं संकेतों के आधार पर व्यक्ति के इरादों को समझने की कोशिश की जा सकती है।
Chanakya Niti : बार-बार नजरें चुराना हो सकता है संकेत
किसी व्यक्ति से बातचीत करते समय उसकी आंखों और नजरों के व्यवहार पर गौर करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति सामान्य बातचीत के दौरान लगातार नजरें चुराता है, बार-बार इधर-उधर देखने लगता है या किसी सवाल का जवाब देते समय असहज नजर आता है, तो उसकी बात को बिना जांचे सच नहीं मानना चाहिए।हालांकि, केवल नजरें चुराने को झूठ का पक्का प्रमाण नहीं माना जा सकता। शर्म, घबराहट या असहजता की वजह से भी कोई व्यक्ति आंखों में आंखें डालकर बात नहीं कर सकता। इसलिए दूसरे व्यवहारों के साथ इस संकेत को समझना अधिक उचित है।
Chanakya Niti : बात और हाव-भाव में अंतर को समझें
व्यक्ति क्या कह रहा है और उसका व्यवहार क्या बता रहा है, दोनों के बीच अंतर दिखाई दे तो उस पर ध्यान देना चाहिए। कई बार कोई व्यक्ति शब्दों में कुछ और कहता है, लेकिन उसके चेहरे के भाव, आवाज का उतार-चढ़ाव या व्यवहार अलग संकेत दे सकते हैं।ऐसी स्थिति में बातचीत को ध्यान से सुनना और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना बेहतर होता है। व्यक्ति के सामान्य व्यवहार की तुलना उसके मौजूदा व्यवहार से करने पर स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।
Chanakya Niti : जरूरत से ज्यादा मीठी बातें करने वालों से रहें सतर्क
हर मीठा बोलने वाला व्यक्ति गलत नहीं होता, लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रशंसा या चापलूसी करने वाले लोगों के मामले में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। चाणक्य नीति में ऐसे लोगों से सतर्क रहने की बात कही गई है, जो अपने स्वार्थ के लिए अत्यधिक मीठी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।कुछ लोग किसी काम को निकलवाने या अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए सामने वाले की जरूरत से ज्यादा तारीफ कर सकते हैं। इसलिए केवल मीठी बातों से प्रभावित होने के बजाय व्यक्ति के व्यवहार और उसके कामों पर भी ध्यान देना चाहिए।
Chanakya Niti : बार-बार सफाई देना और बात बदलना
अगर किसी सामान्य सवाल के जवाब में कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा सफाई देने लगे या बार-बार बातचीत का विषय बदलने की कोशिश करे, तो उसकी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। कई बार व्यक्ति किसी सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय लंबी-लंबी बातें करके मूल मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश करता है।ऐसे में सवाल को दोहराकर स्पष्ट जवाब मांगने के बजाय शांत रहकर उसकी पूरी बात सुनना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। उसके अलग-अलग जवाबों में विरोधाभास है या नहीं, इस पर ध्यान देने से स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।
Chanakya Niti : छोटी बात पर अचानक गुस्सा करना
कई बार व्यक्ति किसी सवाल का जवाब देने के बजाय अचानक गुस्सा करने लगता है। अगर सामान्य और छोटे सवाल पर सामने वाला जरूरत से ज्यादा क्रोधित हो जाए, बातचीत से बचने लगे या सवाल पूछने वाले को ही दोष देने लगे, तो उसके व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए।हालांकि, गुस्सा अपने आप में झूठ का प्रमाण नहीं है। व्यक्ति तनाव, परेशानी या किसी अन्य कारण से भी नाराज हो सकता है। इसलिए उसके गुस्से को दूसरे संकेतों के साथ जोड़कर ही स्थिति को समझना चाहिए।
Chanakya Niti : चाणक्य नीति की इन बातों का रखें ध्यान
चाणक्य नीति से जुड़े इन विचारों का उद्देश्य लोगों के व्यवहार को समझने और धोखे से सावधान रहने की सीख देना है। नजरें चुराना, बात और व्यवहार में अंतर, जरूरत से ज्यादा चापलूसी, बार-बार सफाई देना और छोटी बात पर अत्यधिक गुस्सा करना ऐसे व्यवहार हैं, जिन पर बातचीत के दौरान ध्यान दिया जा सकता है।लेकिन किसी व्यक्ति को सिर्फ एक संकेत के आधार पर झूठा मान लेना उचित नहीं है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी परिस्थिति, व्यक्ति का सामान्य व्यवहार और उसके द्वारा कही गई बातों को समझना जरूरी है। यही सावधानी रिश्तों और व्यवहारिक जीवन में गलतफहमी से बचने में मदद कर सकती है।
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