Fitness Tips : फिटनेस का मतलब केवल कम वजन, फ्लैट टमी या ज्यादा देर तक दौड़ पाना नहीं है। शरीर की वास्तविक फिटनेस का अंदाजा उसकी ताकत, संतुलन, लचीलापन और मोबिलिटी से भी लगाया जा सकता है। यदि शरीर के जोड़ आसानी से मूव करते हैं, आप अपना बैलेंस बनाए रख पाते हैं और रोजमर्रा के काम बिना परेशानी के कर लेते हैं, तो यह अच्छी फिजिकल फिटनेस का संकेत हो सकता है।अच्छी बात यह है कि अपनी बॉडी की कुछ बुनियादी क्षमताओं को जांचने के लिए आपको हमेशा जिम जाने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान मूवमेंट टेस्ट घर पर ही किए जा सकते हैं। इनसे आपको अपनी मौजूदा फिटनेस का सामान्य अंदाजा मिल सकता है और यह भी समझने में मदद मिल सकती है कि किस क्षेत्र पर ज्यादा काम करने की जरूरत है।

Fitness Tips : डीप स्क्वाट होल्ड से जांचें लोअर बॉडी की क्षमता
डीप स्क्वाट होल्ड शरीर के निचले हिस्से की मोबिलिटी, स्थिरता और ताकत को समझने का एक आसान तरीका है। इसके लिए दोनों पैरों को लगभग कूल्हों की चौड़ाई पर रखें और धीरे-धीरे नीचे की ओर स्क्वाट पोजीशन में जाएं।कोशिश करें कि आपकी एड़ियां जमीन पर टिकी रहें और शरीर का संतुलन बना रहे। यदि आप बिना किसी सहारे के करीब 60 सेकंड तक इस स्थिति में रह सकते हैं, तो यह पैरों, टखनों, घुटनों और कूल्हों की अच्छी मोबिलिटी का संकेत हो सकता है।यदि एड़ियां बार-बार जमीन से उठती हैं या आपको सहारे की जरूरत पड़ती है, तो लोअर बॉडी की मोबिलिटी और स्ट्रेंथ पर काम करने की आवश्यकता हो सकती है।
Fitness Tips : डेड हैंग से परखें ग्रिप स्ट्रेंथ
हाथों की पकड़ और शरीर के ऊपरी हिस्से की सहनशक्ति जानने के लिए डेड हैंग टेस्ट किया जा सकता है। इसके लिए किसी मजबूत और सुरक्षित बार को दोनों हाथों से पकड़ें और शरीर को नीचे की ओर लटकने दें।शुरुआत में करीब 30 सेकंड तक टिके रहने का लक्ष्य रखा जा सकता है। अगर आप इतना समय पूरा नहीं कर पाते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। जितने समय तक आप आराम से टिक पाते हैं, उसे अपना शुरुआती स्तर मान सकते हैं।इस टेस्ट में ग्रिप स्ट्रेंथ के साथ कंधों और ऊपरी शरीर का नियंत्रण भी महत्वपूर्ण होता है। इसे हमेशा मजबूत और सुरक्षित बार पर ही करें।
Fitness Tips : फ्लोर गेट-अप टेस्ट बताएगा शरीर का कंट्रोल
फ्लोर गेट-अप एक फंक्शनल मूवमेंट है, जिससे शरीर के संतुलन, ताकत, कोऑर्डिनेशन और मोबिलिटी का सामान्य अंदाजा लगाया जा सकता है। इसमें जमीन की स्थिति से उठकर खड़े होने की कोशिश की जाती है।कोशिश करें कि उठते समय हाथों, घुटनों या किसी अन्य सहारे का इस्तेमाल न करना पड़े। यदि आप आसानी से जमीन से उठकर खड़े हो जाते हैं तो यह शरीर के अच्छे नियंत्रण का संकेत हो सकता है।हालांकि, यदि आपको चोट, दर्द या संतुलन से जुड़ी समस्या है तो इस टेस्ट को अकेले करने से बचें।
Fitness Tips : फॉरवर्ड फोल्ड से जांचें शरीर का लचीलापन
फॉरवर्ड फोल्ड शरीर के पिछले हिस्से की फ्लेक्सिबिलिटी का अंदाजा लगाने में मदद कर सकता है। इसके लिए सीधे खड़े हों और दोनों पैरों के बीच लगभग कूल्हों जितनी दूरी रखें। अब धीरे-धीरे आगे की तरफ झुकें।ध्यान दें कि आपके हाथ कितनी दूर तक पहुंच रहे हैं। यदि हाथ आसानी से नीचे नहीं पहुंच पाते हैं तो यह हैमस्ट्रिंग या कूल्हों के आसपास जकड़न का संकेत हो सकता है।इस टेस्ट के दौरान शरीर को जबरदस्ती नीचे धकेलने या अचानक झटका देने से बचें। लचीलापन धीरे-धीरे स्ट्रेचिंग और नियमित एक्सरसाइज से बेहतर किया जा सकता है।
Fitness Tips : सिंगल लेग बैलेंस से परखें शरीर का संतुलन
सिंगल लेग बैलेंस टेस्ट के जरिए शरीर की स्थिरता और संतुलन का सामान्य अंदाजा लगाया जा सकता है। एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को जमीन से ऊपर उठाएं और शरीर को स्थिर रखने की कोशिश करें।इसके कठिन स्तर में आंखें बंद करके करीब 30 सेकंड तक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाती है। यदि आप लगातार लड़खड़ाते हैं या पैर नीचे रखना पड़ता है तो बैलेंस और टखने की स्थिरता पर काम करने की जरूरत हो सकती है।शुरुआत में यह टेस्ट किसी दीवार या मजबूत फर्नीचर के पास करें, ताकि संतुलन बिगड़ने पर गिरने से बचा जा सके।
Fitness Tips : पांचों टेस्ट से क्या समझ सकते हैं?
इन आसान टेस्ट के जरिए शरीर की अलग-अलग क्षमताओं का सामान्य आकलन किया जा सकता है। डीप स्क्वाट से लोअर बॉडी की मोबिलिटी और स्थिरता, डेड हैंग से ग्रिप स्ट्रेंथ, फ्लोर गेट-अप से फंक्शनल स्ट्रेंथ और कोऑर्डिनेशन, फॉरवर्ड फोल्ड से फ्लेक्सिबिलिटी और सिंगल लेग बैलेंस से शरीर के संतुलन का अंदाजा लगाया जा सकता है।यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति सभी टेस्ट में एक जैसा प्रदर्शन करे। किसी एक टेस्ट में कमजोर प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि आपकी पूरी फिटनेस खराब है। उम्र, शारीरिक बनावट, एक्सरसाइज का अनुभव और स्वास्थ्य जैसी कई चीजें प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।
Fitness Tips : फिटनेस सुधारने के लिए इन बातों पर दें ध्यान
अगर किसी टेस्ट में आपको परेशानी महसूस होती है तो अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे उस क्षेत्र पर काम किया जा सकता है। नियमित वॉकिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज, बैलेंस ट्रेनिंग और हल्की स्ट्रेचिंग को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।फिटनेस में सुधार के लिए जल्दबाजी करने के बजाय निरंतरता जरूरी है। शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
Fitness Tips : टेस्ट करते समय सुरक्षा का रखें ध्यान
घर पर फिटनेस टेस्ट करते समय सबसे पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें। आसपास पर्याप्त जगह होनी चाहिए और फिसलन वाली सतह पर ऐसे मूवमेंट करने से बचें। डेड हैंग के लिए बार की मजबूती सुनिश्चित करना जरूरी है।यदि किसी एक्सरसाइज के दौरान दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं। किसी चोट, गंभीर स्वास्थ्य समस्या या लंबे समय से चल रही शारीरिक परेशानी की स्थिति में फिटनेस टेस्ट और नई एक्सरसाइज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
Fitness Tips : फिटनेस का मतलब सिर्फ वजन कम करना नहीं
एक फिट शरीर वह है जो रोजमर्रा की गतिविधियों को आसानी से करने में सक्षम हो। अच्छी ताकत के साथ संतुलन, मोबिलिटी, लचीलापन और शरीर पर नियंत्रण भी जरूरी है।इसलिए घर पर किए जाने वाले ये टेस्ट आपकी फिटनेस का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, बल्कि अपनी वर्तमान शारीरिक क्षमता को समझने का एक आसान तरीका हैं। समय-समय पर इन्हें सुरक्षित तरीके से दोहराकर आप यह भी देख सकते हैं कि नियमित व्यायाम और बेहतर जीवनशैली से आपकी क्षमता में कितना बदलाव आया है।

