REPORT : AKASH SEN
Plastic Free Court : भोपाल जिला न्यायालय ने रचा नया कीर्तिमान
Plastic Free Court : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का जिला न्यायालय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य का पहला ‘प्लास्टिक-मुक्त कोर्ट परिसर’ बनने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य न्यायालय परिसर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। यह अभियान उन राज्यों की सफल पहलों से प्रेरित है, जहां न्यायालय परिसरों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं।

Plastic Free Court : एडवोकेट अनुराग दुबे ने शुरू की मुहिम
इस जनहित अभियान की शुरुआत भोपाल के अधिवक्ता अनुराग दुबे की पहल से हुई है। उन्होंने न्यायालय परिसर में प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए लोहे की जाली से बने पांच विशेष प्लास्टिक बोतल कलेक्टर दान किए हैं।इन कलेक्टरों को न्यायालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर स्थापित किया गया है, ताकि एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक की बोतलों को अलग से एकत्र कर उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और रीसाइक्लिंग सुनिश्चित की जा सके।
Plastic Free Court : स्वच्छ और हरित न्यायालय परिसर बनाने का लक्ष्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अधिवक्ताओं, वादकारियों, न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय आने वाले नागरिकों के लिए स्वच्छ एवं प्रदूषण-मुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। साथ ही लोगों को प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूक कर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है।
Plastic Free Court : अन्य संस्थानों के लिए बनेगी प्रेरणा
भोपाल जिला न्यायालय की यह पहल राज्य के अन्य सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक संस्थानों और न्यायालय परिसरों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल मानी जा रही है। उम्मीद है कि भविष्य में अन्य जिलों में भी इसी तरह की पर्यावरण-अनुकूल पहल शुरू की जाएगी।
Plastic Free Court : सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश
अधिवक्ता अनुराग दुबे का यह योगदान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व और सार्वजनिक हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह पहल न्यायालय परिसर में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
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