Indus Water Treaty : सिंधु जल संधि निलंबित होने के बाद पाकिस्तान का तीखा बयान
Indus Water Treaty : सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को भारत द्वारा निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान की ओर से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर किसी ने पाकिस्तान के पानी पर हाथ डाला तो “हाथ काट देंगे।” उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।

Indus Water Treaty : ‘भारत पाकिस्तान का पानी रोकना चाहता है’ – मुसादिक मलिक
सोमवार को पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में मुसादिक मलिक ने आरोप लगाया कि भारत सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को मिलने वाले पानी को रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना चाहते हैं और पाकिस्तान तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचने देने की बात कर रहे हैं।
Indus Water Treaty : ‘जो पानी पर हाथ डालेगा, उसका हाथ काट देंगे’
मुसादिक मलिक ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान पहले भी इस तरह के मामलों में जवाब दे चुका है और भविष्य में भी अपने जल अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने दावा किया कि यदि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई रोक लगाने की कोशिश की गई, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
Indus Water Treaty : पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने लिया था बड़ा फैसला
भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने स्पष्ट संदेश दिया था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”
Indus Water Treaty : पानी के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच का सहारा लेने की बात
पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि उनका देश इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाएगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखेगा। उन्होंने इसे पाकिस्तान के बुनियादी अधिकारों से जुड़ा मामला बताया।
Indus Water Treaty : सिंधु जल संधि क्या है?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में हुई एक ऐतिहासिक जल समझौता है। इस संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य सिंधु नदी प्रणाली के जल का दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बंटवारे को सुनिश्चित करना था। हाल के वर्षों में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और आतंकवादी घटनाओं के बाद यह संधि एक बार फिर चर्चा में है। भारत द्वारा संधि को अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार प्रतिक्रिया दे रहा है।
Indus Water Treaty : सिंधु जल संधि कब और क्यों हुई?
1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद सिंधु नदी प्रणाली दोनों देशों में फैली हुई थी। पानी के उपयोग को लेकर विवाद बढ़ने लगा, जिसके समाधान के लिए विश्व बैंक ने मध्यस्थता की। करीब नौ वर्षों की बातचीत के बाद 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता दुनिया के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में गिना जाता है।
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