Rupee vs Dollar : रुपये की कीमत कौन तय करता है? कैसे डॉलर की मांग, कच्चे तेल का आयात और विदेशी निवेश बदलते हैं, रुपये की चाल
Rupee vs Dollar : अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि भारतीय रुपया कभी मजबूत तो कभी कमजोर क्यों हो जाता है। क्या इसकी कीमत सरकार तय करती है या फिर भारतीय रिजर्व बैंक? वास्तव में भारत में रुपये की विनिमय दर मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा बाजार में मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है। इसे Managed Float Exchange Rate प्रणाली कहा जाता है, जिसमें बाजार कीमत तय करता है, जबकि RBI अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर हस्तक्षेप कर सकता है।

Rupee vs Dollar : रुपया कमजोर क्यों होता है?
1 डॉलर की मांग बढ़ने पर
भारत कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कई अन्य उत्पाद विदेशों से आयात करता है। इनका भुगतान अधिकतर अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। जब आयात बढ़ता है, तो डॉलर की मांग भी बढ़ जाती है। मांग बढ़ने पर डॉलर महंगा और रुपया अपेक्षाकृत कमजोर हो जाता है।
2 आयात ज्यादा, निर्यात कम
यदि कोई देश जितना सामान विदेशों को बेचता है, उससे अधिक खरीदता है, तो उसे अतिरिक्त डॉलर की आवश्यकता पड़ती है। इसे व्यापार घाटा (Trade Deficit) कहा जाता है। व्यापार घाटा बढ़ने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
3 विदेशी निवेश का बाहर जाना
विदेशी निवेशक (FPI/FII) जब भारतीय शेयर या बॉन्ड बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ सकता है।
4 अमेरिका की ब्याज दरें
यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ब्याज दरें ऊंची रखता है, तो निवेशकों को अमेरिका में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में वैश्विक पूंजी अमेरिका की ओर जा सकती है, जिससे डॉलर मजबूत होता है।
5 कच्चे तेल की कीमतें
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
Rupee vs Dollar : RBI की क्या भूमिका होती है?
भारतीय रिजर्व बैंक रुपये की कोई निश्चित कीमत तय नहीं करता। हालांकि, यदि बाजार में बहुत अधिक अस्थिरता आ जाए, तो RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) से डॉलर खरीद या बेचकर बाजार को स्थिर करने की कोशिश करता है। इसका उद्देश्य किसी एक निश्चित विनिमय दर को बनाए रखना नहीं, बल्कि अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कम करना होता है।
Rupee vs Dollar : आज क्या है स्थिति?
हाल के कारोबारी सत्रों में 1 अमेरिकी डॉलर लगभग ₹94.4 के आसपास कारोबार कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, फिलहाल रुपये की चाल पर अमेरिका की मौद्रिक नीति, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख प्रमुख रूप से असर डाल रहे हैं।
Rupee vs Dollar : आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ता है?
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का असर सीधे लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
विदेश यात्रा महंगी हो सकती है।
विदेश में पढ़ाई का खर्च बढ़ सकता है।
आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर परिवहन और अन्य वस्तुओं की लागत भी प्रभावित हो सकती है।
वहीं, कुछ निर्यातकों को कमजोर रुपये से प्रतिस्पर्धात्मक लाभ भी मिल सकता है, क्योंकि विदेशों से मिलने वाले डॉलर को रुपये में बदलने पर अधिक राशि प्राप्त होती है।

