Wheat MP : भोपाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और कृषि योजनाओं का असर अब प्रदेश के गेहूं उत्पादन में साफ दिखाई देने लगा है। वर्ष 2026 में मध्यप्रदेश का गेहूं उत्पादन बढ़कर 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादकता 3780 किलो प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। लगातार बढ़ते उत्पादन और गुणवत्ता के चलते मध्यप्रदेश अब “गेहूं प्रदेश” के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

देश के कुल गेहूं उत्पादन में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत हो गई है। वहीं भारत से विदेशों को निर्यात होने वाले गेहूं में प्रदेश का योगदान 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। मध्यप्रदेश के शरबती और ड्यूरम गेहूं की प्राकृतिक मिठास और उच्च गुणवत्ता के कारण इसकी मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में लगातार बनी हुई है।
Wheat MP : अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी एमपी के गेहूं की मांग
प्रदेश का गेहूं ओमान, यूएई, कतर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, मलेशिया, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में पसंद किया जा रहा है। खास बात यह है कि मध्यप्रदेश का गेहूं ब्रेड, बिस्किट और पास्ता निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

सरकार की रणनीतिक योजनाओं के चलते प्रदेश ने पारंपरिक गेहूं उत्पादक राज्यों की बराबरी कर ली है। वर्ष 2004-05 में जहां केवल 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 96.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
Wheat MP : गेहूं की गुणवत्ता ने बढ़ाई साख
भारत सरकार के गेहूं अनुसंधान निदेशालय द्वारा किए गए परीक्षण में मध्यप्रदेश के गेहूं में उच्च गुणवत्ता के पोषक तत्व पाए गए हैं। सामान्य किस्मों में औसतन 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम आयरन और 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया। वहीं कठिया प्रजाति में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीज और जिंक भरपूर मात्रा में मौजूद है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रदेश के गेहूं को बेहतर कीमत मिल रही है।
Wheat MP : कई उन्नत किस्मों का विकास
प्रदेश में विकसित गेहूं की कई उन्नत किस्में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही हैं। जेडब्ल्यूएस-17, जे.डब्ल्यू.-3020 और जे.डब्ल्यू.-321 जैसी किस्में कम सिंचाई में भी 35 क्विंटल तक उत्पादन देने में सक्षम हैं। वहीं जे.डब्ल्यू.-1202, जे.डब्ल्यू.-3288 और जे.डब्ल्यू.-1106 प्रोटीन से भरपूर मानी जाती हैं।

मध्यप्रदेश में अब तक गेहूं की 51 किस्मों का विकास किया जा चुका है, जिनमें पिछले एक दशक में विकसित 12 नई किस्में शामिल हैं। पौष्टिक आहार के लिए उपयोग में लाई जा रही पांच प्रमुख किस्मों में से चार मध्यप्रदेश में विकसित हुई हैं।
Wheat MP : 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आग्रह पर इस वर्ष गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। प्रदेश में 23 मई तक समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी जारी रहेगी।
किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
Wheat MP : बीज उत्पादन में भी अग्रणी बना मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रमाणिक बीज उत्पादक राज्य बन चुका है। सहकारी क्षेत्र में प्रदेश पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है। बीज उत्पादन कंपनियों से तीन लाख से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। ये कंपनियां अब भंडारण, विपणन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
संपादकीय नजरिया
मध्यप्रदेश ने गेहूं उत्पादन और गुणवत्ता के क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह किसानों की अथक मेहनत, वैज्ञानिक खेती और प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। प्रदेश का “गेहूं प्रदेश” बनना केवल आंकड़ों की सफलता नहीं, बल्कि खेतों में पसीना बहाने वाले अन्नदाताओं के संघर्ष और समर्पण की पहचान है। किसान दिन-रात मेहनत कर अन्न का एक-एक दाना तैयार करता है, इसलिए उसकी मेहनत की पूरी कद्र होना जरूरी है। खरीदी केंद्रों पर बारिश में भीगकर खराब होता अनाज हो या वेयरहाउस में सड़ता हुआ अन्न, यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि अन्नदाता के सम्मान के साथ अन्याय है। अन्न की बर्बादी रोकने के लिए कठोर कानून और सख्त जवाबदेही तय होना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि किसान बचेगा तभी जीवन और देश दोनों सुरक्षित रहेंगे।

