Metro Cemetery Route Controversy : कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो रूट को लेकर बढ़ा विवाद
Metro Cemetery Route Controversy : भोपाल में अंडरग्राउंड मेट्रो परियोजना को लेकर सियासत तेज हो गई है। कब्रिस्तान और मस्जिद क्षेत्र के नीचे से मेट्रो रूट गुजरने के प्रस्ताव पर विरोध के बीच बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने बड़ा बयान दिया है।उन्होंने कहा कि अंडरग्राउंड मेट्रो से किसी मस्जिद या कब्रिस्तान को कोई नुकसान नहीं होगा और बेवजह विरोध किया जा रहा है।

Metro Cemetery Route Controversy : “विरोध के नाम पर छाती पीटना बंद करें”
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ राजनीति के लिए इस मुद्दे को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “विरोध के नाम पर छाती पीटना बंद करें। अगर कोई यह सोचता है कि विरोध करने से मेट्रो का रूट बदल जाएगा, तो ऐसा नहीं होने वाला।”उन्होंने यह भी कहा कि समझदार मुस्लिम समाज सच्चाई को अच्छी तरह जानता है और विकास कार्यों का समर्थन करता है।
Metro Cemetery Route Controversy : दिल्ली की जामा मस्जिद का दिया उदाहरण
रामेश्वर शर्मा ने अपने बयान में जामा मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में भी मेट्रो मस्जिद क्षेत्र के नीचे से गुजरती है और वहां किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान सामान्यतः पांच से दस फीट गहराई तक होते हैं, जबकि मेट्रो लाइन 20 से 30 फीट नीचे बनाई जाती है। ऐसे में किसी धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचने की आशंका नहीं है।
Metro Cemetery Route Controversy : “रूट बदलना है तो लागत देनी होगी”
बीजेपी विधायक ने कहा कि यदि किसी को लगता है कि मेट्रो का रूट बदलना चाहिए, तो उसे परियोजना की अतिरिक्त लागत वहन करनी होगी। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की परियोजना को तकनीकी कारणों और जनहित को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
Metro Cemetery Route Controversy : मुस्लिम समाज और वक्फ बोर्ड ने जताया विरोध
इससे पहले मुस्लिम समाज और वक्फ बोर्ड ने कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो रूट निकाले जाने पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि धार्मिक और संवेदनशील स्थलों के नीचे से मेट्रो लाइन निकालना उचित नहीं है।विरोध करने वालों ने प्रशासन से रूट में बदलाव की मांग की है।
Metro Cemetery Route Controversy : मेट्रो परियोजना पर बनी हुई है नजर
भोपाल मेट्रो परियोजना राज्य की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल है। सरकार का दावा है कि इससे शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को तेज एवं सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन मिलेगा।फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-समर्थन का दौर जारी है।
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