Tadmetla Case : 76 जवानों की शहादत को बताया दुखद, पर्याप्त सबूत नहीं होने पर बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला
Tadmetla Case : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चर्चित ताड़मेटला कांड मामले में सुनवाई करते हुए आरोपियों की रिहाई के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि 76 जवानों की शहादत देश के लिए बड़ी क्षति थी, लेकिन पर्याप्त सबूतों के अभाव में आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए सुनाया।

Tadmetla Case : गौरतलब है कि 6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला क्षेत्र में नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें 76 जवान शहीद हो गए थे। यह हमला देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक माना जाता है।हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जांच प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले में आरोपियों की शिनाख्ती परेड नहीं कराई गई। साथ ही अभियोजन पक्ष आरोपियों का नक्सली संगठनों से सीधा संबंध साबित करने में भी विफल रहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि आर्म्स एक्ट के तहत आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी पेश नहीं किए गए, जो जांच की बड़ी खामियां हैं।
Tadmetla Case : मुख्य सचिव और डीजीपी को भविष्य में गंभीर जांच सुनिश्चित करने के निर्देश
Tadmetla Case : इन्हीं कमियों के आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया। साथ ही कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसे गंभीर और जघन्य मामलों की जांच पूरी गंभीरता और पेशेवर तरीके से की जाए, ताकि आरोपियों को सबूतों की कमी का लाभ न मिल सके।
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