REPORT BY : RAKHI VERMA
Political Discipline Controversy : SDOP को धमकाना पड़ा भारी, स्पष्टीकरण देने की तैयारी ,बीजेपी ने माना विधायक का आचरण अनुशासनहीन,आईपीएस एसोसिएशन ने सीएम को लिखा पत्र
Political Discipline Controversy : भाजपा के भीतर अनुशासन को लेकर एक बड़ा कदम सामने आया है,, भाजपा ने शिवपुरी की पिछोर सीट से विधायक प्रीतम सिंह लोधी को उनके विवादित आचरण को लेकर नोटिस जारी किया है और तीन दिन में जवाब मांगा है. इस पूरे मामले ने राजनीतिक के साथ साथ सामाजिक स्तर पर भी हड़कंप मचा दिया है…भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यालय ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि बीते दिनों विधायक प्रीतम सिंह लोधी का आचरण ठीक नहीं था. इसी आधार पर पार्टी मुख्यालय से उन्हें नोटिस जारी किया गया है. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कम लेकिन सटीक शब्दों में नोटिस भेजते हुए यह साफ कर दिया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो आगे की कार्रवाई हो सकती है…पार्टी द्वारा दिए गए नोटिस में विधायक को तीन दिन का समय दिया गया है, ताकि वे अपने पक्ष में जवाब रख सकें. यह नोटिस सीधे पार्टी मुख्यालय से जारी हुआ है, जिससे साफ है कि मामला शीर्ष नेतृत्व की नजर में गंभीर है…इस बयान के बाद मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधायक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की. पुलिस अधिकारियों ने इसे प्रशासनिक अधिकारियों का अपमान और कानून-व्यवस्था को कमजोर करने वाला बताया… दरअसल शिवपुरी जिले से सामने आए एक वीडियो ने सत्ता और प्रशासन के बीच टकराव की तस्वीर उजागर कर दी ।
Political Discipline Controversy : एक जनप्रतिनिधि के तीखे शब्दों ने न केवल विवाद खड़ा किया है, बल्कि कानून व्यवस्था और राजनीतिक मर्यादाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब 16 अप्रैल को बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी की थार गाड़ी से पांच लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद विधायक ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा था कि उनके लिए जनता परिवार से पहले है। हालांकि, घटना के दो दिन बाद जब दिनेश लोधी को करेरा एसडीओपी के सामने पेश किया गया, तो मामला नया मोड़ लेता नजर आया। सूत्रों के मुताबिक, पेशी के दौरान एसडीओपी आयुष जाखड़ ने दिनेश को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि करेरा में नजर मत आ जाना | इसी कथित चेतावनी के बाद विधायक का रुख आक्रामक हो गया। उन्होंने कहा “करैरा किसी के पिता की जागीर नहीं है” और अपने बेटे के वहां आने-जाने और चुनाव लड़ने की बात करते हुए चुनौती देते नजर आए | हालाँकि यह पहला मौका नहीं है जब प्रीतम लोधी के बयान चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी वे प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। उधर इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
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