West Bengal Tamil Nadu Elections : महिला आरक्षण पर एक्शन में जनता,शोर थमा… सियासी संग्राम जारी है…
West Bengal Tamil Nadu Elections : पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी शोर थम गया है।चुनाव प्रचार थमने से पहले सभी दलों के दिग्गजों ने अपना पूरा जोर लगाया है और प्रत्याशी डोर टू डोर हैं। लेकिन चुनावी शोऱ थमने से पहले दिग्गजों की ताबड़तोड़ रेलियों से चुनावी प्रचार अपने चरम पर रहा, राजनेताओं की बयानबाजी से माहौल गरमाया रहा। रैलियों, जनसभाओं और रोड-शो के दौरान आरोप प्रत्यारोप के बीच राजनेताओं ने एक दूसरे को जमकर निशाने पर लिया। लेकिन इसी बीच महिला आरक्षण बिल और ममता के करीबियों पर ED की लगातार कार्रवाई ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया। चुनावी माहौल में महिला आरक्षण बिल का संसद में गिरना और ईडी की छापेमारी और गिरफ्तारियां बड़ा चुनावी मुद्दा बनी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सड़क किनारे एक दुकान पर रुककर ‘झालमुड़ी’ खाने के वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसको ममता ने निशाने पर लिया। अब जो मुद्दे हैं वो तो हैं ही लेकिन ED की कार्रवाई और महिला आरक्षण बिल ने राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी है। एक तरफ जांच एजेंसी की सक्रियता है, तो दूसरी ओर इसे लेकर सियासी घमासान। यानी चुनावी रण अब सिर्फ रैलियों तक सीमित नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के एक्शन तक भी पहुंच चुका है। और महिला आरक्षण पर बवाल तो है ही….पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के इसी चुनावी घमासान पर चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।
West Bengal Tamil Nadu Elections : देश के दो बड़े चुनावी राज्यों पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पहले चरण के मतदान से पहले चुनावी शोर अब थम चुका है।लेकिन उससे पहले चुनावी रण में सियासी पारा अपने चरम पर रहा।दोनों ही राज्यों में दिग्गज नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां रोड-शो और जनसभाएं कर माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह के साथ ही केंद्रीय मंत्रियों, नेताओं और राज्यों के मुख्यमंत्री ने स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी रण में अपना पूरा दम दिखाया। तो वहीं पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन से लेकर अन्य स्थानीय दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। चुनावी शोर थमने से पहले मुद्दों और बयानबाजी का जोर जमकर चला। बीजेपी ने चुनाव प्रचार में कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया। SIR, भ्रष्टाचार, लैंड जिहाद, घुसपैठ, महिला अत्याचार जैसे मुद्दों पर टीएमसी को आड़े हाथों लिया, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा पर जोर रहा तो वहीं भयमुक्त बंगाल का नारा दिया। भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर ’15 साल के कुशासन’ को खत्म कर सत्ता परिवर्तन का दावा किया है। लेकिन भाजपा के दावों पर पलटवार ममता दीदी ने भी जोरदार किया। टीएमसी ने ‘बंगाली अस्मिता’ का मुद्दा उठाया, रोजगार बनाम योजनाएं, सुरक्षा बनाम सियासत, और पहचान बनाम विकास के बीच लकीर खीचीं। तो वहीं विकास, ईडी की कार्रवाई को केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग, महिला आरक्षण, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जमकर सियासी वार-पलटवार देखने को मिला। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे हमले किए। भ्रष्टाचार गुंडागर्दी और घुसपैठ जैसे मुद्दों को लेकर उन्हें निशाने पर लिया।
West Bengal Tamil Nadu Elections : भाजपा के आरोपों पर ममता बनर्जी ने करारा जवाब दिया। उन्होंने बीजेपी पर बंगाल की छवि खराब करने और राज्य विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने भाजपा पर संविधान को कमजोर करने, बंगाल को जलाने की साजिश रचने और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर राज्य को डराने का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी रैलियों में इसे ‘बंगाल की अस्मिता की रक्षा’ की लड़ाई बताया।
West Bengal Tamil Nadu Elections : अब आरोप प्रत्यारोप और अपने अपने मुद्दों के दम पर ममता और भाजपा आमने सामने हैं। बीजेपी ने सत्ता-विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश की है,तो वहीं टीएमसी ने चौथी बार सरकार बनाने के लिए अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा जताया है। लेकिन चुनाव प्रचार के आखिर वक्त में महिला का आरक्षण का मुद्दा और ममता के करीबियों पर केंद्रीय एजेंसियों के छापे क्या गुल खिलाएंगे ये देखने वाली बात होगी। अब इंतजार दो दिन बाद 23 अप्रैल का है जब तमिलनाडु की सभी और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान होगा। जिसमें मतदाता तय करेंगे कि किसके वादों पर भरोसा जताना है और किसे सत्ता की चाबी सौंपनी है।।
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