Isa Ahmad
Malda Election Violence: Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में इलेक्शन ऑब्जर्वरों को बंधक बनाए जाने की घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर है, जिसमें अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और उन्हें खाना-पानी तक नहीं दिया गया।
Malda Election Violence: 9 घंटे तक बंधक रहे 7 अधिकारी, खाना-पानी तक नहीं मिला; कोर्ट ने कहा- कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने इस घटना को “सोची-समझी और भड़काऊ” करार दिया। कोर्ट ने कहा कि इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना हो सकता है।
Malda Election Violence: राज्य के गृह सचिव और DGP से मांगा जवाब, चुनावी प्रक्रिया बाधित करने की आशंका
दरअसल, 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर मालदा के बीडीओ कार्यालय पहुंचे थे, जहां वोटर लिस्ट से नाम कटने के विरोध में हजारों लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय का घेराव कर लिया और अधिकारियों को बाहर निकलने नहीं दिया।
Malda Election Violence: शाम से शुरू हुआ यह घेराव देर रात तक चलता रहा। रात करीब 11 बजे पुलिस की मदद से अधिकारियों को बाहर निकाला गया, लेकिन इस दौरान उनकी गाड़ियों पर पथराव किया गया और नुकसान पहुंचाया गया।
कोर्ट ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और गृह सचिव, डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों से जवाब तलब किया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने इस घटना को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।
वहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा हैं। मामले में आगे की सुनवाई जारी है और चुनाव आयोग को भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।





