Rajesh Khanna: बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता अनीता आडवाणी की अपील को खारिज कर दिया। उन्होंने दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ अपने संबंधों को शादी के समान दर्जा देने की मांग की थी। न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने डिंडोशी कोर्ट के पुराने फैसले को बरकरार रखा, जिसमें अनीता आडवाणी के दीवानी मुकदमे को तकनीकी आधार पर खारिज किया गया था। इस फैसले से डिंपल कपाड़िया और अक्षय कुमार को बड़ी राहत मिली।
Rajesh Khanna: कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि
अनीता आडवाणी और राजेश खन्ना के परिवार के बीच यह विवाद 2012 में सुपरस्टार के निधन के बाद शुरू हुआ था। 2017 में डिंडोशी सिविल कोर्ट ने उनके दावे को खारिज किया था। इसे चुनौती देते हुए अनीता ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच लंबी बहस हुई। अदालत ने संक्षिप्त आदेश में कहा, “प्रथम अपील खारिज की जाती है।”
Rajesh Khanna: घरेलू हिंसा और संपत्ति विवाद

अनीता आडवाणी ने डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के खिलाफ बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट में घरेलू हिंसा का आपराधिक मामला दर्ज कराया था। उनका दावा था कि वह राजेश खन्ना के साथ उनके बंगले आशीर्वाद में लिव-इन रिलेशनशिप में थीं, लेकिन सुपरस्टार के निधन के बाद उन्हें वहां से जबरन हटाया गया। उन्होंने अपने रिश्ते को शादी जैसा कानूनी सम्मान देने की मांग की थी।
Rajesh Khanna: हाई कोर्ट की पिछली टिप्पणियाँ
2015 में बॉम्बे हाई कोर्ट की समन्वय पीठ ने डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा की कार्यवाही को रद्द कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अनीता आडवाणी का राजेश खन्ना के साथ संबंध “शादी जैसा” नहीं था और महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत नहीं आता।
Rajesh Khanna: खन्ना परिवार का पक्ष मजबूत
अदालत ने माना कि चूंकि राजेश खन्ना ने डिंपल कपाड़िया से औपचारिक तलाक नहीं लिया था, इसलिए किसी अन्य महिला के साथ उनके संबंध को विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता। बुधवार के फैसले से खन्ना परिवार का पक्ष और मजबूत हुआ और अनीता आडवाणी की लंबी कानूनी लड़ाई को बड़ा झटका लगा। अब सुपरस्टार की विरासत और संपत्ति पर उनके दावों की कानूनी संभावना लगभग समाप्त हो गई है।
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