Mahavir Jayanti 2026: जानें भगवान महावीर का जीवन, शिक्षाएं और इस पावन पर्व का महत्व

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Mahavir Jayanti 2026

Mahavir Jayanti 2026: हर वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महावीर जयंती मनाई जाती है। यह दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 31 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। जैन समुदाय के लिए यह दिन सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों में से एक होता है।

Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती कैसे मनाई जाती है

इस दिन जैन समाज के लोग भगवान महावीर की शिक्षाओं को याद करते हुए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिरों को सजाया जाता है और भगवान महावीर की प्रतिमा का विधिवत अभिषेक किया जाता है। कई स्थानों पर भव्य रथ यात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसके साथ ही दान-पुण्य, सेवा कार्य और धार्मिक प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।

भगवान महावीर की पंचमहाव्रत शिक्षाएं- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह- जैन धर्म की आधारशिला मानी जाती हैं और इस दिन इन्हें विशेष रूप से अपनाने का संकल्प लिया जाता है।

Mahavir Jayanti 2026: राजकुमार वर्धमान से भगवान महावीर बनने की यात्रा

भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व वैशाली गणराज्य के क्षत्रियकुंड गांव में एक राजपरिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था। जन्म के बाद उनका नाम वर्धमान रखा गया, जिसका अर्थ समृद्धि होता है।

युवावस्था में वर्धमान ने राजसी जीवन का त्याग कर सत्य और आत्मज्ञान की खोज का मार्ग चुना। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर-परिवार छोड़कर संन्यास ग्रहण किया और कठोर तपस्या में लीन हो गए।

Mahavir Jayanti 2026: कठिन तपस्या और केवलज्ञान की प्राप्ति

संन्यास लेने के बाद भगवान महावीर ने लगभग 12 वर्षों तक कठिन तप, मौन, उपवास और आत्मसंयम का पालन किया। अंततः उन्हें ऋजुबालिका नदी के तट पर एक शाल वृक्ष के नीचे केवलज्ञान (कैवल्य) की प्राप्ति हुई। यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने उन्हें एक जागृत आत्मा के रूप में स्थापित किया।

Mahavir Jayanti 2026: धर्म प्रचार और अंतिम समय

ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान महावीर ने लगभग 30 वर्षों तक विभिन्न क्षेत्रों- बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और उड़ीसा में भ्रमण कर धर्म का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने लोगों को सत्य, अहिंसा और संयम का मार्ग दिखाया।

72 वर्ष की आयु में, कार्तिक अमावस्या के दिन बिहार के पावापुरी में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया। यह दिन आज भी दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती का संदेश

महावीर जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता को अहिंसा, सत्य और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला पर्व है। भगवान महावीर का जीवन हमें सिखाता है कि त्याग, संयम और आत्मज्ञान के माध्यम से ही सच्ची शांति और मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।

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