संवाददाता- प्रताप सिंह बघेल
नगरा घाट पर जेसीबी से खुलेआम अवैध उत्खनन, पुलिस की नाक के नीचे से गुजर रहे सैकड़ों ट्रैक्टर
Morena चम्बल नदी का जल स्तर कम होते ही बजरी माफियाओं की गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। राजघाट पुल से लेकर पोरसा के नगरा घाट तक कई स्थानों पर दिन-दहाड़े रेत का अवैध उत्खनन जारी है। माफिया बेखौफ होकर जेसीबी मशीनों से रेत निकाल रहे हैं और प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए इसका परिवहन किया जा रहा है।

दिन के उजाले में चल रहा अवैध उत्खनन
Morena बारिश का मौसम खत्म होते ही दिसंबर से चम्बल का जल स्तर धीरे-धीरे घटने लगता है। जनवरी के पहले सप्ताह तक नदी अपनी सामान्य धारा में आ जाती है, जिससे किनारों पर जमा चमकदार रेत बाहर आ जाती है। इसी का फायदा उठाकर माफिया अस्थायी घाट बनाते हैं और बड़े पैमाने पर खुदाई शुरू कर देते हैं। नगरा घाट पर रात करीब तीन बजे से सुबह नौ बजे तक जेसीबी से रेत निकाली जाती है, जिसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अलग-अलग इलाकों के लिए रवाना हो जाती हैं।

पर्यावरण और राजस्व दोनों को नुकसान
Morena अवैध रेत खनन से जलीय जीवों का जीवन संकट में है और नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। इसके साथ ही सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ती रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आम लोगों के लिए खतरा बन चुकी हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है।
पुलिस की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
Morena स्थानीय लोगों के मुताबिक नगरा थाने के सामने से रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां गुजरती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा है। ग्रामीणों का आरोप है कि माफिया पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कथित रूप से मासिक वसूली करते हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार एजेंसियां इस खुले खेल पर रोक लगाएंगी या चम्बल यूं ही लुटती रहेगी?
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