रतलाम: प्रिंसिपल की फटकार से डरा छात्र तीसरी मंजिल से कूदा, बाल-बाल बची जान

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रतलाम: प्रिंसिपल की फटकार से डरा छात्र तीसरी मंजिल से कूदा, बाल-बाल बची जान

रतलाम के बोधि इंटरनेशनल स्कूल में शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा होते-होते टल गया। 8वीं कक्षा के छात्र ने प्रिंसिपल ऑफिस में सस्पेंड करने की बात सुनकर डर के चलते स्कूल की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। घटना सुबह करीब 10 बजे की है। गनीमत रही कि छात्र की जान बच गई, हालांकि दोनों पैर समेत कई जगह चोटें आई हैं और वह अस्पताल में भर्ती है।

मोबाइल से क्लासरूम की रील बनाकर इंस्टाग्राम पर डाली थी

बच्चा 27 नवंबर को क्लास के दौरान मोबाइल से वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर रील अपलोड कर चुका था। इसकी जानकारी क्लास टीचर ने प्रिंसिपल को दी। शुक्रवार सुबह उसे प्रिंसिपल ऑफिस में बुलाया गया। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि बच्चा करीब 4 मिनट तक प्रिंसिपल कक्ष में रहा और इस दौरान लगातार 52 बार ‘सॉरी’ बोलता रहा।

बच्चे के अनुसार प्रिंसिपल ने उसे स्कूल से सस्पेंड करने, करियर खत्म होने और मेडल छिनने की चेतावनी दी। यह सुनकर वह बुरी तरह डर गया। कमरे से निकलते ही वह तेज़ी से तीसरी मंजिल तक भागा और नीचे कूद गया। पूरा घटनाक्रम महज 4 मिनट में हुआ।

पिता वेटिंग रूम में थे, शोर सुनकर दौड़े

स्कूल ने उसी सुबह छात्र के पिता को बिना कारण बताए बुलाया था। पिता 9:59 बजे स्कूल पहुंचे और वेटिंग रूम में बैठे थे। अचानक शोर मचने पर वह बाहर निकलकर आए तो देखा कि बेटा जमीन पर घायल पड़ा है। स्कूल स्टाफ ने उन्हें कार से अस्पताल पहुँचाया।

छात्र की बात- “मैडम ने कहा था तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता, डर गया था”

अस्पताल में छात्र ने बताया:

  • तीन-चार टीचरों ने मोबाइल लाने पर डांटा।
  • प्रिंसिपल मैडम ने कहा- “तुम्हें रेस्टिकेट कर देंगे, मेडल रख लेंगे, तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता।”
  • एक टीचर ने कहा- “अगली बार तुम्हारा आता ही नहीं है, तुम ऐसे ही रहोगे।”
  • “मुझे लगा अब मैं कहीं एडमिशन भी नहीं ले पाऊंगा, इसलिए डर गया और कूद गया।”

छात्र ने स्वीकार किया कि उसने दोस्तों के कहने पर मज़ाक-मस्ती में वीडियो बनाया था और पहली बार मोबाइल स्कूल लेकर आया था।

पिता का आरोप – “बच्चे को मानसिक रूप से तोड़ दिया, स्कूल पर ताला लगना चाहिए”

पिता ने भावुक होकर कहा-

  • “बेटा 7 साल से स्केटिंग कर रहा है, नेशनल मेडलिस्ट है, कभी निराश नहीं हुआ।”
  • “प्रिंसिपल और टीचरों के कठोर व्यवहार से वह डरकर यह कदम उठाने मजबूर हुआ।”
  • “मुझे पहले बुलाया होता, दो मिनट पहले चैंबर में ले जाते तो आज वो अस्पताल में न होता।”
  • “स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

स्कूल प्रबंधन का बयान

प्रिंसिपल डॉली चौहान ने कहा:

  • “बच्चा मोबाइल लाया था और क्लास का वीडियो अपलोड किया था।”
  • “हमने सिर्फ समझाइश दी थी, सस्पेंड करने की बात समझाने के तौर पर कही।”
  • “पिता को देखते ही बच्चा घबरा गया होगा। हमने उसे रिलैक्स होने को कहा था।”

डॉक्टरों की रिपोर्ट

  • छात्र के दोनों पैरों में कई फ्रैक्चर हैं।
  • सिर में गंभीर चोट नहीं है।
  • मल्टीपल सर्जरी करनी होगी।
  • पूर्ण रिकवरी में 6–7 महीने लग सकते हैं।

इस घटना ने स्कूलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया, बच्चों पर मानसिक दबाव और प्रबंधन की ज़िम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस व प्रशासन को मामले की जांच कर उचित कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में किसी बच्चे को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

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