Mohit Jain
चीन अपनी सीमा सुरक्षा को हाई-टेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। देश की UBTech रोबोटिक्स को इंडस्ट्रियल-ग्रेड ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात करने के लिए 264 मिलियन युआन (करीब 330 करोड़ रुपये) का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह रोबोट दिसंबर से गुआंग्शी के वियतनाम बॉर्डर पर लगाए जाएंगे। यह पहल चीन के उन प्रयासों को दर्शाती है, जिनके तहत सार्वजनिक स्थानों से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों तक रोबोट के इस्तेमाल को बढ़ाया जा रहा है।

UBTech को मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
इस प्रोजेक्ट के लिए वियतनाम सीमा से लगे शहर फांगचेंगगांग में एक ह्यूमनॉइड रोबोट सेंटर के साथ समझौता किया गया है। यहां UBTech का Walker S2 मॉडल तैनात किया जाएगा, जिसे दुनिया का पहला ऐसा रोबोट माना जा रहा है जो अपनी बैटरी को खुद बदल सकता है।
Walker S2 रोबोट की खासियतें
रिपोर्ट के अनुसार, पायलट प्रोग्राम में Walker S2 बॉर्डर पर यात्रियों को गाइड करने, पेट्रोलिंग में मदद करने, भीड़ प्रबंधन करने, सामान ढोने और कमर्शियल सर्विस सपोर्ट जैसे कई काम करेगा। इमिग्रेशन से जुड़े कार्यों के अलावा यह रोबोट स्टील, कॉपर और एल्युमीनियम की फैक्ट्रियों में निरीक्षण कार्य के लिए भी उपयोग होगा।

स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स में उपयोग
चीन पहले ही एयरपोर्ट, सरकारी दफ्तरों और बड़े आयोजनों में रोबोट का इस्तेमाल कर चुका है, जिनमें यात्रियों के सवालों का जवाब देने से लेकर सुरक्षा पेट्रोलिंग तक शामिल है। Walker S2 को खास तौर पर स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी ऊंचाई 1.76 मीटर है और यह 52 डिग्री फ्रीडम पर काम करता है। यह रोबोट 1.8 मीटर की ऊंचाई तक 15 किलो भार एक हाथ से उठा सकता है और आसानी से बैठने-उठने की क्षमता रखता है।
ऑटोनोमस हॉट-स्वैपेबल ड्यूल बैटरी तकनीक
सबसे खास इसकी ऑटोनोमस हॉट-स्वैपेबल ड्यूल बैटरी तकनीक है, जिससे यह मात्र 3 मिनट में अपनी बैटरी बदलकर लगातार 24 घंटे तक काम कर सकता है।

BrainNet 2.0 और Co-Agent AI सिस्टम से संचालित
यह रोबोट UBTech के BrainNet 2.0 और Co-Agent AI सिस्टम से संचालित होता है, जो इसे निर्णय लेने और माहौल को पहचानने की क्षमता देता है। प्योर RGB स्टीरियो विजन सिस्टम इसे इंसानों की तरह आसपास के वातावरण को समझने में सक्षम बनाता है। यह 7.2 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता है।
भविष्य की योजना: 10 हजार रोबोट सैनिक
चीन की योजना है कि इस साल के अंत तक 500 रोबोट बॉर्डर पर तैनात किए जाएं और 2027 तक 10 हजार रोबोट सैनिकों की तैयार फोर्स बनाई जाए। यह प्रोजेक्ट सीमा सुरक्षा में तकनीक के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।





