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अंबिकापुर: केते एक्सटेंशन ओपन कोल माइंस को मिली पर्यावरण मंजूरी,पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंह देव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

अंबिकापुर: केते एक्सटेंशन ओपन कोल माइंस को मिली पर्यावरण मंजूरी,पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंह देव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

Report: Dinesh Gupta, Edit BY: Mohit Jain

केते एक्सटेंशन ओपन कोल माइंस को पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंह देव ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यह मंजूरी क्षेत्र के पर्यावरण और सांस्कृतिक धरोहर के लिए गंभीर नुकसानदायक साबित हो सकती है।

रामगढ़ पर्वत पर बड़े नुकसान की आशंका
जानकारी के अनुसार, कोल माइंस का विस्तारित क्षेत्र रामगढ़ पर्वत से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है। इसी पर्वत पर प्राचीन राम मंदिर स्थित है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि कोयला खनन से इस ऐतिहासिक स्थल को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंच सकता है।

कांग्रेस जांच टीम की रिपोर्ट पहले ही कर चुकी है चेतावनी
पूर्व डिप्टी सीएम ने पहले भी रामगढ़ पर्वत के पास कोल माइंस को मंजूरी देने का विरोध किया था। कांग्रेस की जांच टीम ने मौके पर सर्वे कर संभावित पर्यावरणीय व सांस्कृतिक नुकसान की रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत था कि खनन गतिविधि से पर्वत, जंगल और धार्मिक धरोहर को बड़ा खतरा है।

केंद्र से मिली थी मंजूरी की जानकारी
मंजूरी की प्रक्रिया पीएमओ और पर्यावरण विभाग से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर आगे बढ़ाई गई। इन सूचनाओं की पुष्टि के बाद ही कोल माइंस को पर्यावरणीय अनुमति जारी की गई है।

स्थानीय स्तर पर बढ़ सकती है नाराजगी
पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस फैसले से क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना, जैव-विविधता और धार्मिक महत्व वाले स्थलों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में टी.एस. सिंह देव का बयान स्थानीय विरोध को और ताकत देता हुआ दिखाई दे रहा है।

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