by: vijay nandan
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर फैली अफवाह ने पूरे देश को हिला दिया। रावलपिंडी की आदियाला जेल में बंद इमरान खान के “मारे जाने” की खबर फैलते ही तनाव बढ़ गया और शहर में हाई अलर्ट जारी करना पड़ा। अफगानिस्तान टाइम्स द्वारा की गई पोस्ट के बाद हालात बेकाबू होते चले गए, समर्थक सड़कों पर उतर आए और जेल की ओर कूच करने लगे।
जेल में इमरान खान की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
इमरान खान को 2023 में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। तब से वे अपनी पत्नी बुशरा बीबी के साथ सजा काट रहे हैं। कुछ दिन पहले ही इमरान ने आरोप लगाया था कि जेल में उनकी जान को खतरा है। उनका दावा था कि यदि उनके साथ कुछ अप्रत्याशित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर होगी।

25 नवंबर की शाम, प्रदर्शन ने स्थिति बदतर की
मंगलवार को बड़ी संख्या में पीटीआई समर्थक जेल के बाहर इकट्ठा हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची भीड़ में इमरान खान की बहन आलीमा खान भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सप्ताह से परिवार को मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा रही, हर आवेदन को रद्द कर दिया जाता है। इसी दौरान पार्टी नेताओं ने अपने समर्थकों से “इमरान की रिहाई” के लिए एकजुट होने की अपील की, जिससे माहौल और भड़क गया।

अफवाह कैसे फैली?
- Afghanistan Times की रिपोर्ट
अफगानिस्तान टाइम्स ने अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इमरान खान की जेल में मौत हो चुकी है। पोस्ट सामने आते ही खबर पूरे दक्षिण एशिया में वायरल हो गई। अब तक न तो पाकिस्तान सरकार और न ही जेल प्रशासन ने इस दावे का स्पष्ट खंडन किया है—यही चुप्पी सवाल बढ़ा रही है।
- पत्रकारों का आरोप, मुलाकात पूरी तरह बंद
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार इफ्तिखार का कहना है कि कई दिनों से किसी को भी इमरान से मिलने नहीं दिया गया, न वकील, न डॉक्टर।
कुछ समय पहले इमरान ने तीव्र स्वास्थ्य समस्या का जिक्र किया था, जिसके बाद उनके समर्थक और भी चिंतित हैं।
- जेल स्टाफ ने भी नहीं देखा
इसी पत्रकार ने दावा किया कि पिछले एक हफ्ते से जेल कर्मियों को भी इमरान खान का सीधा सामना नहीं हुआ। यह बात इंटरनेट पर फैलते ही अटकलें तेज हो गईं।
- रावलपिंडी में सुरक्षा घेरा
एंटी-टेररिज्म कोर्ट (ATC) ने रावलपिंडी और आस-पास के इलाकों में तत्काल सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया।
यह बढ़ी हुई तैयारियां जनता के बीच यह संकेत दे रही हैं कि हालात सामान्य नहीं हैं—हालांकि प्रशासन पूरी तरह मौन है।
- संपर्क बंद, पीटीआई नेताओं की बेचैनी
पीटीआई लीडर अब्दुल समद ने कहा कि दो हफ्तों से इमरान से किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया।
पार्टी नेताओं का कहना है कि जेल प्रशासन कोई सूचना साझा नहीं कर रहा, जिससे चिंता और ज्यादा गहरी हो गई है।
सरकार और जेल प्रशासन की चुप्पी, सवालों का पहाड़
इस मामले में न पाकिस्तान सरकार और न जेल अधिकारी आगे आकर स्पष्टीकरण दे रहे हैं। मुलाकात रोकना, अचानक सुरक्षा कड़ा करना, और अफवाहों पर कोई बयान न देना—इन सबने देशभर में असमंजस बढ़ा दिया है। इमरान खान की लोकप्रियता और संवेदनशील राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह मुद्दा एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल सकता है।





