फरीदाबाद में डॉक्टर के कमरे से 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद, असॉल्ट राइफल और कारतूस भी मिले,दो डॉक्टर समेत 7 गिरफ्तार

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फरीदाबाद में डॉक्टर के कमरे से 360 किलो विस्फोटक बरामद, असॉल्ट राइफल और कारतूस भी मिले

हरियाणा के फरीदाबाद में पुलिस ने एक डॉक्टर के किराए के कमरे से 360 किलो विस्फोटक (संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट), असॉल्ट राइफल, और कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में की गई।
डॉक्टर की पहचान अनंतनाग निवासी डॉ. आदिल अहमद के रूप में हुई है, जिसे 7 नवंबर को यूपी के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था।

आदिल की निशानदेही पर चला सुराग

पुलिस पूछताछ में आदिल ने कबूल किया कि उसने फरीदाबाद के धौज गांव में किराए पर कमरा लेकर वहां विस्फोटक सामग्री रखी थी। जांच में पता चला है कि वह खुद उस कमरे में नहीं रहता था और सिर्फ सामान रखने के लिए किराए पर लिया गया था।
आदिल के साथ ही एक अन्य डॉक्टर मुजाहिल शकील को भी पुलवामा से गिरफ्तार किया गया है।

कश्मीर में लॉकर से मिली थी AK-47

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में आदिल के लॉकर से दो दिन पहले AK-47 राइफल बरामद की गई थी। इसी खुलासे के बाद फरीदाबाद स्थित कमरे पर छापा मारा गया, जहां भारी मात्रा में विस्फोटक मिला।

पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासे

फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया:

  1. यह एक बड़ा आतंकी मॉड्यूल हो सकता है, जांच जारी है।
  2. बरामद विस्फोटक RDX नहीं, बल्कि अमोनियम नाइट्रेट प्रतीत हो रहा है।
  3. कमरे से असॉल्ट राइफल, तीन मैगजीन और एक पिस्टल बरामद हुई हैं।
  4. आरोपी आदिल पहले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुका है।

UAPA के तहत केस दर्ज

डॉ. आदिल अहमद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) कानून (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह विस्फोटक और हथियार किस नेटवर्क से जुड़े हैं और इन्हें कहां उपयोग में लाया जाना था।

2,900 किलो विस्फोटक और विदेशी हैंडलरों से संपर्क

न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक की जांच में पुलिस ने करीब 2,900 किलोग्राम विस्फोटक और आईईडी बनाने का सामान बरामद किया है। गिरफ्तार आरोपियों में फरीदाबाद के डॉक्टर मुअज़मिल अहमद गनई और कुलगाम निवासी डॉक्टर आदिल शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और सोशल व एजुकेशनल नेटवर्क्स के जरिए फंड जुटा रहे थे।

यह मामला अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी जांच का विषय बन गया है, क्योंकि इसमें आतंक के नेटवर्क से जुड़ी कड़ियाँ सामने आ रही हैं।

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