BY: Yoganand Shrivastva
बलिया: जिले के बड़सरी जागीर गांव में पिछले तीन महीनों से लगातार जलजमाव बना हुआ है, जिससे गांव के जीवन पर गंभीर असर पड़ा है। 300 आबादी वाले इस गांव की राजभर बस्ती में पानी का स्तर इतना बढ़ गया है कि घरों में रहना मुश्किल हो गया है और पारिवारिक जीवन प्रभावित हुआ है। जलजमाव के कारण कई नई नवेली दुल्हनें अपने ससुराल छोड़कर मायके लौट गई हैं, जिससे गांव में सामाजिक स्थिति और पारिवारिक रिश्तों पर भी असर पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन, स्थानीय विधायक और मंत्री उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्रामीण डीज़ल इंजन की मदद से चंदा इकट्ठा कर पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके रास्ते में कई बाधाएँ हैं। गांव के दबंग और बड़े लोग अपने घरों को सुरक्षित रखने के लिए जलनिकासी के रास्ते रोक देते हैं, जिससे अन्य हिस्से जलजमाव में डूबे रहते हैं। इससे खासकर महिलाएं, बच्चियां और बुजुर्ग सबसे अधिक परेशान हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पानी में चलते समय महिलाओं और बच्चियों को अपने कपड़े ऊपर उठाकर चलना पड़ता है, जिससे लोक, लाज और शर्म के कारण कई नई नवेली दुल्हनें मायके लौट गई हैं।
गांव के लोगों ने बार-बार जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इस दर्दनाक स्थिति के चलते ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि उनके गांव को गोद लिया जाए, ताकि आवश्यक सुधार और जलनिकासी के काम हो सकें। ग्रामीणों का कहना है, “साहब, हमारे गांव को गोद ले लीजिए,” ताकि उनकी बस्ती और घर सुरक्षित रह सकें और पारिवारिक जीवन सामान्य रूप से चल सके।
इस पूरी स्थिति के बीच ग्रामीण अपनी क्षमता के अनुसार चंदा इकट्ठा कर डीज़ल इंजन से पानी निकाल रहे हैं, लेकिन रास्ते में रोड़े डालने के कारण उनका प्रयास सीमित रह रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक नजरअंदाज करने की नीति के कारण गांव की स्थिति बिगड़ रही है। ग्रामीण आशा कर रहे हैं कि सरकार उनके गांव को गोद लेकर जलजमाव और अन्य समस्याओं का समाधान करेगी, जिससे जीवन सामान्य हो सके और दुल्हनों को अपने ससुराल लौटने का अवसर मिल सके।





