US Election Hacking : अवर्गीकृत खुफिया दस्तावेजों का हवाला देकर राष्ट्रपति ट्रंप ने जताई चुनावी सुरक्षा पर चिंता
US Election Hacking : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की चुनावी सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने अवर्गीकृत (Declassified) खुफिया दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ गैर-सरकारी समूह अमेरिकी चुनावी प्रणाली को साइबर हमलों के जरिए प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ट्रंप ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम और चुनावी डेटाबेस की सुरक्षा को लेकर तत्काल सुधार की जरूरत बताई।

US Election Hacking : चुनावी प्रणाली की कमजोरियों का किया जिक्र
‘इलेक्शन इंटीग्रिटी’ पर दिए गए संबोधन में ट्रंप ने कहा कि हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेज बताते हैं कि अमेरिकी प्रशासन को कई वर्षों से चुनावी ढांचे की कमजोरियों की जानकारी थी। उनके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें, मतगणना प्रणाली और चुनावी डेटाबेस साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील हैं।
US Election Hacking : चार देशों का लिया नाम
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया समुदाय के आकलन के अनुसार रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के पास अमेरिकी चुनावी ढांचे से छेड़छाड़ करने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव से जुड़े केंद्रीय डेटाबेस तक पहुंच बनाई जाए तो चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
US Election Hacking : 2020 चुनाव और वेनेजुएला का भी किया जिक्र
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि सीआईए की रिपोर्ट में वेनेजुएला की सरकार पर 2020 के अमेरिकी चुनावों में डिजिटल हस्तक्षेप की योजना बनाने का उल्लेख है। उनके अनुसार रिपोर्ट में ऐसे तरीकों का जिक्र है जिनसे चुनाव परिणामों में डिजिटल स्तर पर बदलाव किया जा सकता था।
US Election Hacking : चुनावी सुरक्षा मजबूत करने की मांग
ट्रंप ने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार के साइबर खतरे से बचने के लिए अमेरिका को अपनी चुनावी प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाना होगा। व्हाइट हाउस के अनुसार सार्वजनिक किए गए दस्तावेज जनवरी 2020 से जून 2026 के बीच तैयार खुफिया आकलनों पर आधारित हैं और इनका उद्देश्य चुनावी सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों को सामने लाना है।
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