BY: Yoganand Shrivastva
ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने हाल ही में उन्हें छात्रों के प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने, हिंसा और सामूहिक हत्या जैसे गंभीर आरोपों में अभियुक्त बनाया है। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हसीना की गैरहाजिरी में ही इस मामले की सुनवाई शुरू की जाएगी।
सत्ता से बाहर होने के 10 महीने बाद बड़ी कार्रवाई
हसीना सरकार के सत्ता से हटने के करीब दस महीने बाद अब यह बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल पीठ ने अभियोजन पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा,
“हम प्रस्तुत आरोपों को संज्ञान में लेते हैं और अगली कार्यवाही शुरू की जाएगी।”
इसके साथ ही शेख हसीना और उस समय के गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के खिलाफ नया गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया गया है। जबकि तीसरे आरोपी, उस समय के पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून, पहले से हिरासत में हैं और उनके विरुद्ध मुकदमा उनकी उपस्थिति में ही चलेगा।
ट्रिब्यूनल की सुनवाई का लाइव प्रसारण – क्या है इसका उद्देश्य?
बांग्लादेश के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी न्यायाधिकरण की सुनवाई को टीवी पर सीधा प्रसारित किया गया। जानकारों का मानना है कि यह कदम भारत में शरण ले रहीं शेख हसीना तक सीधा संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि उन पर मानसिक दबाव बनाया जा सके।
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को छात्रों के एक व्यापक प्रदर्शन के बाद हसीना सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था। इसके बाद से उनके खिलाफ कई आपराधिक मामलों की जांच और कानूनी कार्यवाही शुरू हो चुकी है।
भारत से प्रत्यर्पण की मांग
इससे पहले भी ICT ने शेख हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक राजनयिक अनुरोध भेजा था, जिसमें हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की गई थी। भारत ने इस नोट को प्राप्त करने की पुष्टि की है, लेकिन उसने इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।





