सरला मिश्रा हत्याकांड: 28 साल बाद नई जाँच, दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप

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1997 में हुई सरला मिश्रा की संदिग्ध मौत

भोपाल। 28 साल पुराने एक रहस्यमयी मामले ने एक बार फिर सुर्खियाँ बटोरी हैं। 1997 में हुई सरला मिश्रा की संदिग्ध मौत के मामले में भोपाल की जिला अदालत ने फिर से जाँच के आदेश दिए हैं। सरला मिश्रा, जो उस समय कांग्रेस की प्रमुख नेता थीं, 14 फरवरी 1997 को अपने सरकारी आवास में जली हुई मिली थीं। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन उनके परिवार का आरोप है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उनके भाई लक्ष्मण सिंह का नाम भी सामने आया था।

क्या हुआ था उस दिन?

14 फरवरी 1997 को सरला मिश्रा भोपाल के साउथ टीटी नगर स्थित अपने आवास में गंभीर रूप से जलने की हालत में मिलीं। उन्हें पहले भोपाल के हमीदिया अस्पताल और फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ 19 फरवरी को उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या का मामला बताया, लेकिन बाद में हत्या का केस दर्ज किया गया।

राजनीतिक साजिश के आरोप

सरला मिश्रा के भाई अनुराग मिश्रा ने लंबे समय से यह दावा किया है कि उनकी बहन की हत्या एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत की गई थी। उनके अनुसार, सरला मिश्रा उस समय कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बड़ी भूमिका निभा रही थीं और उनकी बढ़ती प्रभावशाली छवि कुछ लोगों को रास नहीं आ रही थी।

कोर्ट ने खारिज की पुलिस की रिपोर्ट

पुलिस ने 2019 में इस मामले को बंद करने की सिफारिश करते हुए एक “खात्मा रिपोर्ट” पेश की थी, लेकिन अनुराग मिश्रा ने इसके खिलाफ आपत्ति जताई। उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद अब जिला अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज करते हुए नई जाँच के आदेश दिए हैं।

न्यायिक मजिस्ट्रेट पलक राय ने कहा कि पुलिस की जाँच अधूरी और पक्षपातपूर्ण लगती है। उन्होंने टीटी नगर पुलिस को मामले की फिर से जाँच करने और नए सबूतों के आधार पर आरोप-पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

1997 में हुई सरला मिश्रा की संदिग्ध मौत

दिग्विजय सिंह पर क्या है आरोप?

इस मामले में दिग्विजय सिंह और उनके भाई लक्ष्मण सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं। अनुराग मिश्रा का दावा है कि सरला मिश्रा की हत्या में उनकी भूमिका हो सकती है, क्योंकि उस समय दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और पुलिस प्रशासन पर उनका पूरा नियंत्रण था।

क्या अब मिलेगा इंसाफ?

28 साल बाद भी यह मामला अनसुलझा है, लेकिन अदालत के नए आदेश से परिवार को उम्मीद है कि अब सच सामने आएगा। क्या पुलिस वाकई में निष्पक्ष जाँच करेगी? क्या दिग्विजय सिंह जैसे बड़े नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई हो पाएगी? ये सवाल अभी बाकी हैं।

इस मामले की जाँच अब एक बार फिर शुरू होगी, और पूरे देश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या इस बार न्याय मिल पाएगा।

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