मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में साफ पेयजल पहुंचाने के लिए सीएम डॉ मोहन यादव की सरकार नई नई पहल कर रही है….अब सरकार ने फैसला लिया है कि जल आपूर्ति के लिए बनाई गईं नल जल योजनाओं का संचालन पंचायतें करेंगी…जिनकी मदद के लिए पानी समितियां बनाई जाएंगी और सरपंच इसके अध्यक्ष होंगे…इतना ही नहीं समितियों में 50 प्रतिशत महिलाओं को जगह मिलेगी….इसके तहत पहली बार नए कनेक्शन पर एक से लेकर दस हजार रुपये जन सहयोग राशि लेने का प्रावधान किया गया है.. पानी समिति को अंत्योदय, विधवा और दिव्यांगजन परिवारों का मासिक शुल्क पांच से 10 फीसदी तक कम करने का अधिकार भी होगा और जल संरक्षण के लिए अपव्यय रोकने पर समितियां 200 से 500 रुपये तक जुर्माना भी लगा सकेंगी…योजना के संचालन के लिए मध्य प्रदेश पंचायत ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नियम 2026 तैयार कर आपत्ति-सुझाव मांगें गए हैं..ग्राम पंचायत नल जल योजना के संचालन, संधारण, रखरखाव, मरम्मत, उन्नयन सुनिश्चित भी करेगी…जलकर का निर्धारण, पंपिंग के लिए बिजली बिलों का भुगतान, जल संरक्षण के काम भी पंचायतों की देख-रेख में होंगे…प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के लिए जल जीवन मिशन में 18 हजार से ज्यादा योजनाएं बनाई गई हैं…पहले इनका संचालन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जरिए करने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट मांगा गया था…लेकिन कैबिनेट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद योजना के संचालन का जिम्मा पंचायतों को सौंपने का फैसला किया है..

