भोपाल में 76 स्थानों पर एक साथ निकले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन

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Rashtriya Swayamsevak Sangh's marches were held simultaneously at 76 places in Bhopal.

भोपाल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर भोपाल महानगर में रविवार को विभिन्न जिलों और बस्तियों में कुल 76 स्थानों पर पथ संचलन निकाले गए। इसमें विद्युत जिले में 31, प्रताप जिले में 13, तात्या टोपे जिले में 12, भोजपुर जिले में 4 एवं विक्रम जिले में 16 स्थानों पर पथ संचलन आयोजित किए गए। विभिन्न नगर, खंड और बस्तियों से निकले इन पथ संचलनों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के साथ-साथ समाज के प्रबुद्ध जन और मातृशक्ति सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर उपस्थित मुख्य वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष, संघ की स्थापना, पंच परिवर्तन, समाज जीवन सहित कुटुम्ब प्रबोधन में संघ की भूमिका तथा भारतीय संस्कृति और परंपरा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। पथ संचलन के माध्यम से जहां संगठन शक्ति का भाव नजर आया, वहीं समाज के सभी वर्गों को जोड़ने, देशभक्ति और राष्ट्रनिष्ठा को मजबूत करने का संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया।

विद्युत जिले में अनेक नगर एवं खंडों से पथ संचलन निकाले गए। साकेत नगर के आयोजन में मुख्य अतिथि श्रीमती उषा पुंडे रहीं, इस अवसर पर माननीय प्रांत संघचालक श्री अशोक पांडेय ने उद्बोधन दिया। उन्होंने वीर शिवाजी महाराज के पराक्रम, मुगलकाल के संघर्ष और पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों पर विस्तृत चर्चा की। श्री पांडेय ने वीर शिवाजी महाराज के अदम्य साहस और संगठन की शक्ति को रेखांकित करते हुए बताया कि इतिहास में संगठन के बल पर ही भारत ने विदेशी आक्रांताओं का सामना किया था। उन्होंने पंच परिवर्तन को समाज जीवन में आवश्यक सांस्कृतिक और चारित्रिक सुधारों का आधार बताया। वहीं अवध नगर के विवेकानंद बस्ती में निकले पथ संचलन में माननीय विभाग संघचालक श्री सोमकांत उमालकर जी ने संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी का जीवन परिचय बताते हुए संघ की स्थापना, स्वतंत्रता आंदोलन में संघ की भूमिका तथा शताब्दी यात्रा के प्रमुख पड़ावों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पंच परिवर्तन की प्रक्रिया से समाज जीवन में सर्वांगीण बदलाव संभव है। साथ ही अयोध्या नगर के वृंदावन बस्ती में निकाले गये पथ संचलन में पंडित सीताराम पाठक मुख्य रूप से उपस्थित हुए। इस दौरान प्रांत सह संपर्क प्रमुख श्री गिरीश जोशी का उद्बोदन हुआ। उन्होंने संघ की पृष्ठभूमि, पंच परिवर्तन के पांचों विषय – नागरिक शिष्टाचार, सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का बोध एवं पर्यावरण का महत्व इत्यादि विषय की जानकारी दी।

तात्या टोपे जिले के अंबेडकर नगर कोटरा बस्ती में पथ संचलन शासकीय नवीन कन्या विद्यालय, नेहरू नगर से प्रारंभ हुआ। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की उपस्थिति में इस आयोजन में नगर संघचालक श्री गोपाल दास मेहता तथा अंतरराष्ट्रीय भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. लता सिंह मुंशी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। विद्या भारती मध्यभारत सह-प्रांत प्रमुख श्री दीपक चंदेवा ने अपने उद्बोधन में पंच परिवर्तन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए शाखा के माध्यम से समाज में आए परिवर्तनों का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने मातृशक्ति की भूमिका पर विशेष बल दिया। इसी क्रम में महावीर नगर, चूना भट्टी बस्ती में कर्नल अभय मेहता के मुख्य आतिथ्य में पथ संचलन निकला। इस अवसर पर विभाग बौद्धिक प्रमुख श्री नीरज पांडे जी ने भगवान श्रीरामचंद्र द्वारा संगठित वानर सेना की शक्ति और संगठन के महत्व पर उपस्थित स्वयंसेवकों और समाजजनों को संबोधित किया।

भोजपुर जिले के नीलबड़ मंडल में भी पथ संचलन में खंड संघचालक श्री सुदीप खरे और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार श्री वेकंट रमण सिंह श्याम उपस्थित हुए। पथ संचलन उपरांत प्रांत सद्भावना सह प्रमुख श्री निमिष सेठ ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से लेकर वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तक की संगठन यात्रा का सार प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह यात्रा राष्ट्र जीवन में संगठन, सेवा और संस्कार के सूत्रों को मजबूत करने वाली रही है।

प्रताप जिले के सुभाष नगर स्थित आचार्य नरेंद्र देव बस्ती से पथ संचलन निकाला गया, जिसमें जैन संत उपाध्यक्ष श्री अशोक सागर एवं मुनि श्री विनीबोध जी सागर का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।टीलारामपुरा बस्ती में श्री मुकेश भूरानी के मुख्य आतिथ्य में निकले पथ संचलन में श्री रमेश नायक ने संघ परिचय, पंच परिवर्तन और समाज जीवन में स्वयंसेवकों की भूमिका पर चर्चा की। इसी क्रम में शंकराचार्य खंड की गणेशपुरा महामाई बस्ती में आयोजित पथ संचलन में डॉ. संदीप शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। यहां श्री दिलीप बुरानी ने पंच परिवर्तन के सूत्रों और उनके समाज जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर अपने विचार रखे।

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