Report: Mulchand
Neemuch news: नीमच जिले के जावद थाना क्षेत्र के नई बावल गांव में एक बार फिर सामाजिक कुरीतियों की अमानवीय तस्वीर सामने आई है। रैगर समाज में प्रचलित तथाकथित ‘झगड़ा प्रथा’ के तहत सुनाए गए कठोर सामाजिक आदेश से मानसिक रूप से टूट चुकी 25 वर्षीय महिला ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया। गंभीर हालत में उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
जानकारी के अनुसार, नई बावल निवासी लक्ष्मी पति प्रवीण ने शनिवार को अपने घर पर ज़हर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन तत्काल उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। घटना की खबर फैलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
पीड़िता के पति प्रवीण का आरोप है कि यह कदम किसी पारिवारिक विवाद का नहीं, बल्कि समाज के कुछ लोगों द्वारा थोपे गए अमानवीय सामाजिक फैसले का नतीजा है। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी का पहला विवाह करीब सात साल पहले रामपुरा में हुआ था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वह वहां नहीं रह सकीं। इसके बाद तीन माह पूर्व लक्ष्मी ने प्रवीण से दूसरा विवाह किया, जिससे समाज के कुछ पदाधिकारियों ने नाराज़गी जताई।
प्रवीण के अनुसार, 6 दिसंबर को समाज की पंचायत आयोजित की गई, जिसमें अध्यक्ष कारूलाल रैगर, उपाध्यक्ष मोहनलाल रैगर सहित अन्य लोगों ने दंपती पर 9 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और 14 वर्षों के लिए समाज से बहिष्कृत करने का फरमान सुना दिया। इसके बाद से महिला लगातार मानसिक तनाव और सामाजिक तिरस्कार का सामना कर रही थी।
पीड़ित पति ने बताया कि इतनी बड़ी राशि देना उनके लिए संभव नहीं है। समाज के दबाव ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया कि परिवार के सामने जीवन समाप्त करने या घर-खेत बेचकर दर-दर भटकने जैसी नौबत आ गई थी। इसी मानसिक पीड़ा ने लक्ष्मी को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी अमानवीय सामाजिक प्रथाओं पर सख्त रोक लगाई जाए और पंचायत के नाम पर गैरकानूनी फरमान सुनाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते इन कुरीतियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो समाज के कमजोर वर्ग ऐसे ही मानसिक उत्पीड़न का शिकार होते रहेंगे।





