Mohit Jain
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर स्मारक टिकट और सिक्का जारी कर समारोह का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया और हजारों लोगों के साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहीं। देशभर में सुबह 10 बजे लोगों ने सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया।

मोदी बोले: वंदे मातरम् देश की आत्मा का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “7 नवंबर का दिन भारतवासियों के लिए ऐतिहासिक है। वंदे मातरम् वो प्रेरक आह्वान है जिसने अनेक पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई है।” उन्होंने कहा कि यह उत्सव 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में मनाया जाएगा।
वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा
- 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम् की रचना अक्षय नवमी के दिन की थी।
- यह गीत पहली बार उनकी पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में उपन्यास ‘आनंदमठ’ के हिस्से के रूप में प्रकाशित हुआ।
- 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे मंच से गाकर राष्ट्र की चेतना को स्वर दिया।

ब्रिटिश काल में वंदे मातरम् पर प्रतिबंध
1905 के बंगाल विभाजन आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् आज़ादी की आवाज बन गया। कई जगह स्कूलों में इसे गाने पर प्रतिबंध लगाया गया और छात्रों पर जुर्माना लगाया गया। बावजूद इसके, आंदोलनकारियों ने गीत गाना नहीं छोड़ा।
आज़ादी के बाद मिला राष्ट्रगीत का दर्जा
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका ऐतिहासिक रही है और इसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान मिलेगा।
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, त्याग और स्वतंत्रता की पहचान है। इसके 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में मनाया जा रहा यह उत्सव राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना को नई ऊंचाई देने का प्रतीक बन गया है।





