Mamaji Manikchandra Vajpayee की 107वीं जयंती पर विशेष आयोजन
भोपाल स्थित विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश में प्रख्यात पत्रकार-संपादक मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी की 107वीं जयंती के अवसर पर 7 अक्टूबर को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ‘राष्ट्रहित और पत्रकारिता’ विषय पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं अर्चना प्रकाशन के उपाध्यक्ष माधव सिंह दांगी ने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व संवाद केंद्र न्यास के अध्यक्ष लाजपत आहूजा ने की। आयोजन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर तैयार विशेषांक ‘मध्यभारत में संघ विकास की यात्रा’ का भी विमोचन किया गया।
Mamaji Manikchandra Vajpayee की पत्रकारिता में राष्ट्रहित को बताया सर्वोच्च
मुख्य वक्ता माधव सिंह दांगी ने कहा कि एक संवाददाता की दृष्टि का सीधा प्रभाव उसके द्वारा तैयार समाचार और उसके जरिए समाज पर पड़ता है। इसलिए समाचार लिखते समय पत्रकार को यह विचार करना चाहिए कि उसकी खबर का समाज और राष्ट्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मामाजी का मानना था कि समाचार निष्पक्ष होना चाहिए। पत्रकार की अपनी विचारधारा हो सकती है, लेकिन उसकी व्यक्तिगत विचारधारा समाचार की प्रस्तुति में नहीं दिखाई देनी चाहिए। यदि पत्रकार किसी घटना को लेकर अपनी राय रखना चाहता है तो उसके लिए लेख या विश्लेषण का माध्यम इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह पत्रकार तथ्यात्मक समाचार और अपने विचारों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रख सकता है।
Mamaji Manikchandra Vajpayee ने देश और राष्ट्र के अंतर को समझाया
माधव सिंह दांगी ने देश और राष्ट्र की अवधारणा को अलग-अलग तरीके से समझाते हुए कहा कि भौगोलिक सीमाएं किसी देश का निर्माण करती हैं, जबकि संस्कृति राष्ट्र की पहचान को आकार देती है। उन्होंने इजराइल का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय इजराइल राजनीतिक रूप से देश के रूप में अस्तित्व में नहीं था, लेकिन यहूदियों की चेतना में राष्ट्र की भावना जीवित रही।
उन्होंने कहा कि यही सांस्कृतिक चेतना किसी समाज को उसकी राष्ट्रीय पहचान से जोड़ती है और पत्रकारिता में भी राष्ट्र तथा समाज के व्यापक हित को समझने की दृष्टि जरूरी है।
Mamaji Manikchandra Vajpayee सादा जीवन और उच्च विचार के प्रतीक
मामाजी से जुड़े व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए माधव सिंह दांगी ने कहा कि वे हर प्रकार के काम को समान महत्व देते थे। वे छोटे-छोटे कार्य स्वयं करके दूसरों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करते थे। युवा पत्रकारों और लेखकों को तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने मामाजी को ‘सादा जीवन-उच्च विचार’ का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि वे बाहरी वेशभूषा की तुलना में विचारों और व्यवहार को लेकर अधिक सजग रहते थे। उनके लिए व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके विचारों और कर्मों से होती थी। दांगी ने कहा कि मामाजी को वह परमहंस की श्रेणी में मानते हैं, जिनकी दृष्टि में किसी प्रकार का व्यक्तिगत दोष नहीं था।
Mamaji Manikchandra Vajpayee ने पत्रकारिता के श्रेष्ठ मानक स्थापित किए
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लाजपत आहूजा ने कहा कि मामाजी ने किसी औपचारिक पत्रकारिता संस्थान से शिक्षा नहीं ली थी, लेकिन अपनी कर्मठता और पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने उच्च मानक स्थापित किए। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि एक कांग्रेस नेता से जुड़ी आपत्तिजनक तस्वीरें सामने आई थीं और उन पर समाचार तैयार किया गया था।
आहूजा के अनुसार, मामाजी ने उस खबर और तस्वीरों को प्रकाशित करने से रोक दिया। उनका तर्क था कि समाचार पत्र परिवारों तक पहुंचता है और ऐसी सामग्री का पारिवारिक वातावरण पर उचित प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह प्रसंग पत्रकारिता में जिम्मेदारी, मर्यादा और सामाजिक सरोकार को लेकर उनकी सोच को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान मामाजी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने अपने पत्रकारिता के दायित्व और लेखन से दूरी नहीं बनाई।
Mamaji Manikchandra Vajpayee की किताबों से सामने आई संघ की महत्वपूर्ण जानकारी
लाजपत आहूजा ने कहा कि मामाजी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। इनमें ‘आपातकाल का संघर्ष’, ‘मध्यभारत की संघगाथा’ और ‘ज्योति जला निज प्राण की’ जैसी रचनाएं प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि मामाजी की लेखनी और उनके दस्तावेजी कार्य के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा उसके सामाजिक कार्यों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। उनकी पत्रकारिता केवल तत्कालीन घटनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने महत्वपूर्ण विषयों को पुस्तक और लेखन के माध्यम से भी दर्ज किया।
Mamaji Manikchandra Vajpayee परंपरा से जुड़ा विशेषांक हुआ जारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विश्व संवाद केंद्र की ओर से ‘मध्यभारत में संघ विकास की यात्रा’ नाम से विशेषांक तैयार किया गया है। कार्यक्रम में इसका विमोचन भी किया गया।
इस विशेषांक में मध्यभारत में संघ कार्य के विस्तार और विकास की यात्रा से जुड़ी जानकारी को शामिल किया गया है। विशेषांक का संपादन लेखक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने किया है। आयोजन के माध्यम से मामाजी की पत्रकारिता और संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े विषयों को एक साथ सामने रखा गया।
Mamaji Manikchandra Vajpayee की पत्रकारिता आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा
मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी की पत्रकारिता को लेकर विश्व संवाद केंद्र में पहले भी उनके जीवन, मूल्यों और पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चर्चा होती रही है। विश्व संवाद केंद्र के अनुसार, मामाजी ने पत्रकारिता को केवल पेशे के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी के माध्यम के रूप में अपनाया।
उनकी पत्रकारिता में समाचार की विश्वसनीयता, राष्ट्रहित, सामाजिक सरोकार और व्यक्तिगत आचरण को महत्वपूर्ण स्थान मिला। यही कारण है कि उनकी पत्रकारिता आज भी युवा पत्रकारों के लिए अध्ययन और प्रेरणा का विषय बनी हुई है।
Mamaji Manikchandra Vajpayee कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम के अंत में विश्व संवाद केंद्र न्यास के सचिव डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता की विद्यार्थी आराधना मौर्य ने किया।
आयोजन में विश्व संवाद केंद्र के पदाधिकारी, पत्रकार, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारिता के विद्यार्थी उपस्थित रहे। विशेष व्याख्यान और विशेषांक के विमोचन के जरिए मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी की पत्रकारिता, उनके विचारों और राष्ट्रहित आधारित पत्रकारिता की परंपरा को याद किया गया।


